स्वतंत्र देव का पूर्वांचल, अवध, पश्चिम और बुंदेलखंड में समान प्रभाव माना जाता है। कारण, पूर्वांचल के मिर्जापुर के रहने वाले स्वतंत्र देव की सियासत का केंद्र अवध और बुंदेलखंड रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के प्रभारी के रूप में प्रदेश में उनकी सक्रियता थी।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से अपना दल की लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है। पूर्वांचल के दो बड़े पिछड़ा वोट बैंक कुर्मी और राजभर को साधने के लिए भाजपा ने अपना दल और बाद में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया था। मगर, सहयोगी दलों की महत्वाकांक्षा के चलते भाजपा ने या तो उनसे किनारा कर लिया या कम तवज्जो दी है।
भाजपा के खिलाफ आग उगल रहे सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था। कुर्मी बिरादरी में मजबूत पैठ वाली अपना दल (एस) को केंद्र सरकार में जगह नहीं दी गई है।
देश और प्रदेश की सियासत में भाजपा के लिए पूर्वांचल प्राथमिकता पर है। पूर्वांचल का केंद्र काशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और वर्ष 2014 के बाद इस क्षेत्र को भाजपा ने हमेशा तवज्जो दी। प्रदेश में पूर्ण बहुमत के बाद गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर पूर्वांचल का मान बढ़ाया। इसके अलावा पार्टी केशव प्रसाद मौर्य और डा. महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल को लेकर अपने इरादे जता चुकी है।