विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
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मंदिरों को पहले मुगल शासकों ने तोड़ा, अब सरकार तोड़ने में लगी है। दोनों में कोई अंतर नहीं है। काशी के मूल स्वरूप और सनातन धर्म की रक्षा के लिए काशीवासियों को आगे आना होगा। यह बातें शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं।
वह मंगलवार को विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में भवनों के ध्वस्तीकरण का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि कहा कि सरकार सुंदरीकरण के नाम पर खुद मंदिरों को तोड़ने और विग्रहों को खंडित करने का काम कर रही है।
उन्होंने प्रशासन और सरकार के रवैए पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर के विस्तार के दूसरे विकल्प भी हैं, उन पर विचार क्यों नहीं किया गया। इस दौरान उन्होंने परिक्षेत्र के मंदिरों में पूजा-पाठ किया।
व्यास भवन टूटने के बाद से किराए पर रह रहे व्यासजी से भी मिले। ललिता घाट पहुंचने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का ढोल-नगाड़े के साथ हर हर महादेव के उद्घोष से स्वागत हुआ।