आरोप पत्र आने के बाद आरोपी समेत कई लोगों के खिलाफ पहले समन फिर वारंट जारी हुआ। कोर्ट में पेश नहीं होने पर कुर्की का आदेश भी हो चुका था। इसके बाद आरोपी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई, जो अदालत ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी थी।
इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट में हाजिर होकर जमानत की गुहार लगाई और अंतरिम जमानत पर रिहा हुए। उनकी तरफ से अधिवक्ता धीरेंद्र नाथ शर्मा, प्रभुनरायण पांडेय, बच्चा द्विवेदी, रमेश उपाध्याय, ब्रजेश मिश्र आदि ने पैरवी की।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि भारतीय नागरिक होने के कारण कोर्ट का सम्मान और कानून का पालन करना नैतिक दायित्व है। कोर्ट ने हाजिर होने की अपेक्षा की, हम प्रस्तुत हो गए। प्रकरण के बाबत कहा कि सब जानते हैं कि हम लोग किसी भी तरह के अपराध में संलिप्त नहीं रहे, राजनीतिक विद्वेष वश तत्कालीन सरकार ने मुकदमा कायम कराया। अदालत से फरार होने की जानकारी मिली, तब हम हाजिर हो गए। जानबूझकर कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज नहीं किया।