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स्वामी अग्निवेश ने पीएम और संघ प्रमुख को दी इस बात की चुनौती

Fri, 21 Sep 2018 01:32 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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स्वामी अग्निवेश - फोटो : अमर उजाला
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स्वामी अग्निवेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत को वाराणसी में शास्त्रार्थ की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि ये हिंदू धर्म से खिलवाड़ कर रहे हैं। राजनीति के लिए हजारों लाखों साल पुरानी परंपरा का गला घोटा जा रहा है।
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उन्होंने मॉब लिंचिंग और आतंकवाद को एक ही जैसा बताया। विश्व शांति दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को मानवाधिकार जन निगरानी समिति के कार्यक्रम से पूर्व स्वामी अग्निवेश ने सामाजिक न्याय की वकालत करते हुए सत्ता परिवर्तन की बात भी की।

उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर राजनीतिक लाभ के लिए रात के 12 बजे अध्यादेश सरकार जारी किया गया। अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश की जा रही है। जब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लिख कर दे दिया कि निकाहनामे में तीन तलाक के खिलाफ शर्तें लिख देंगे कि तीन तलाक नहीं दिया जा सकता। लेकिन, मोदी सरकार इसको जल्दबाजी में पास कराके क्रेडिट लेने में लगी है।
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उन्होंने कहा कि वह कोई नई पार्टी नहीं बना रहा हूं। मेरी कोशिश है की सारी विपक्षी पार्टियां एकजुट हो जाएं। विपक्ष की बातों को भी इनकॉरपोरेट करें कि तीन साल तक उनको, पीडि़ता को गुजारा भत्ता कौन देगा, वर्ना  सीधे सीधे संसद में बहस कराकर पास कराना चाहिए था। 
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फासीवादी ताकतें आवाज दबाने का कर रही हैं प्रयास

विश्व शांति दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ आयोजन - फोटो : amar ujala
मानवाधिकार जन निगरानी समिति, जनमित्र न्यास और सावित्री बाई फूले महिला पंचायत ने यातना पीड़ितों को उनके संघर्षों के लिए सम्मानित किया। ये वो पीड़ित थे जो पुलिस की यातना, फर्जी मुकदमों का दंश झेल रहे थे।

मुख्य अतिथि समाजसेवी स्वामी अग्निवेश और विशिष्ट अतिथि स्वामी आर्यवेश व सामाजिक कार्यकर्ता मनोहर मानव ने सोनभद्र के 12 और वाराणसी के छह पीड़ितों को सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि स्वामी अग्निवेश ने कहा कि न्याय के लिए लगातार लड़ते रहना ये उन लोगों के लिए प्रेरणा जो लत के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। महत्वपूर्ण है कि ऐसे लोग भारत के संविधान और न्याय व्यवस्था में अपना विश्वास रखते हैं।

जबकि भारत में ऐसा माहौल बना है कि व्यक्ति संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखता है तो कुछ फासीवादी ताकतें उनके ऊपर हमला कर उनकी आवाज दबाने का प्रयास करती हैं। इसका उदाहरण मैं खुद हूं। संयोजक डॉ. लेनिन रघुवंशी ने कहा कि हम बहादुर पीड़ितों का सम्मान कर उसे वो बल देना चाहते हैं जिससे कि वो अपनी लड़ाई के लिए संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ते रहें। 
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