उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी से कहना चाहता हूं कि भारत एक संस्कृत, संस्कृति और संस्कार की देव भूमि है। जो भारत का संस्कार है वह हम सबका संस्कार है। देश का सम्मान हमारा सम्मान है। देश की गरिमा का आजीवन पालन करूंगा। हम सभी राष्ट्र के आदर के साथ सदैव समर्पित हैं।
कुलपति प्रो राजाराम शुक्ल ने स्वामी अद्भूत वल्लभ दास को हृदय से बधाई देते हुये कहा कि स्वामी जी संस्कृत और आधुनिक तकनीकी के क्षेत्र में समन्वय स्थापित कर एक नया अन्वेषण करेंगे।
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 37वें दीक्षांत महोत्सव मे 32 मेधावियों को सुवर्ण पदक द्दिये जाएंगे, जिसमें सर्वाधिक मेडल आचार्य के वेदांत विषय मे सर्वाधिक अंक पाने वाले स्वामी अद्भुत वल्लभ दास जी को 10 सुवर्ण पदक दिये जाएंगे।