जून में मलेरिया रोधी माह मनाया जाएगा। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर हर सप्ताह 2 दिन निशुल्क जांच कराई जाएगी। वहीं, ‘हर रविवार मच्छर पर वार’ कार्यक्रम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस साल छह महीने में मलेरिया के 53 मरीज मिल चुके हैं। सीएमओ डॉक्टर वीबी सिंह ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में मलेरिया से बचाव के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है। आशा और एएनएम के माध्यम से जलभराव वाले स्थलों पर कीटनाशक का छिड़काव कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान जलभराव, कूलर में जमा पानी, टैंक और गमले की सफाई को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडे ने बताया कि जनवरी से अब तक 9800 ब्लड स्लाइड बनाकर जांच हुई। 53 मलेरिया के मरीज मिल चुके हैं। ज्यादातर मरीज शहरी क्षेत्र के हैं और सभी का उपचार भी हो गया है। मलेरिया पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा देर तक बुखार आता है। 10 से 12 दिन तक इसका प्रभाव रह सकता है
मलेरिया के लक्षण
तेज बुखार के साथ ठंड लगना।
उल्टी, दस्त, तेज पसीना आना।
शरीर का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहना
सिरदर्द, शरीर में जलन।
शरीर में कमजोरी महसूस होना
ऐसे करे बचाव
आसपास व घरों में साफ-सफाई रखें।
कूलर के पानी की सप्ताह में एक बार सफाई करें
पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना
पुराने बर्तनों, टायरों एवं खाली गमलों में पानी जमा न होने दें।
सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना।
मंथन : तीसरी लहर में दिव्यांगजनों पर ज्यादा खतरा
वाराणसी। कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर में दिव्यांगजनों पर ज्यादा खतरा रहेगा। सामान्य बच्चों की तुलना में दिव्यांग बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में सरकार को कोरोना के मद्देनजर दिव्यांगजनों पर खास ध्यान देना चाहिए। यह बातें बीएचयू के सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर विभाग के प्रोफेसर एवं समन्वयक डॉ. परिमल दास ने कही। वह बुधवार को कोरोना की तीसरी लहर और दिव्यांगजन विषय पर आयोजित वर्चुअल विचार मंथन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर बोल रहे थे। मनोचिकित्सक एवं राष्ट्रीय मानसिक दिव्यांग संस्थान सिकंदराबाद के सदस्य डॉ. तुलसीदास ने कहा कि क्रोमोसोम डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से ग्रसित बच्चे कोरोना से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे बच्चों को बचाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति और दिव्यांगजनों के लिए पूरे देश में अलग से कोविड हेल्पलाइन सेंटर खोलने की आवश्यकता है। केंद्रीय सलाहकार बोर्ड दिव्यांगजन विभाग के सदस्य डॉ. उत्तम ओझा ने बताया कि सरकार ने इस दिशा में प्रयास करना शुरू कर दिया है। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी दिव्यांग विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाकर उनकी भी मदद ले सकते हैं। ब्यूरो