गंगा के साथ भाजपा नेता सुनील कुमार ओझा
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वह एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। बाद में, ओजा एक अन्य बागी नेता व मोदी सरकार में पूर्व मंत्री गोवर्धन झड़फिया की बनाई गई महागुजरात जनता पार्टी में शामिल हो गए। हालांकि बाद में 2011 में वह एक बार फिर भाजपा के करीब आ गए। फिर उन्हें गुजरात भाजपा का प्रवक्ता बना दिया गया। जब 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी ने वाराणसी लोकसभा से चुनाव लड़ने का फैसला किया तो सुनील ओजा, अरुण सिंह और सुनील देवधर को चुनाव की जिम्मेदारी संभालने के लिए भेजा गया। चुनाव के बाद सुनील देवधर और अरुण सिंह ने तो दूसरी जिम्मेदारियां संभाल लीं मगर, सुनील ओजा वाराणसी में ही रह गए। 2014 से पहले अमित शाह को यूपी भाजपा का प्रभारी बनाया गया तो सुनील ओजा को सहप्रभारी बना दिया गया। 2014 में वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र की जिम्मेदारी के लिए खुद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें चुना था। ओजा तब से काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। 2019 में उन्हें गोरक्ष प्रांत की भी जिम्मेदारी दी गई थी। गढ़ौली धाम में सरकारी खर्च पर 1008 सामूहिक विवाह कराने के बाद विवाद में आए ओजा का स्थानांतरण प्रदेश सह प्रभारी के रूप में बिहार कर दिया गया था।