रामनगर में लीला देखने उमड़ी भीड़।
बरसहीं सुमन छनहीं छन देवा, नाचहिं गावहिं लावहिं सेवा। देखि मनोहर चारिउ जोरी, सारद उपमा सकल ढंढोरी। भगवान राम समेत चारो भाइयों की बारात तक अयोध्या पहुंची तो देवों ने फूलों की वर्षा की। चारो भाइयों की जोड़ी देखकर देवता और सरस्वती इतने अभिभूत थे कि वह इसे क्या उपमा थे यह ढूंढ नहीं पा रहे थे। बारात पहुंचने मानो पूरे अयोध्या के लोग बारात का स्वागत करने के लिए उमड़ पड़े हों। आतिशबाजी के साथ अगुवानी की गई। हर ओर जय श्रीराम के जयकारे गूंज रहे थे। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर लोगों ने बधाइयां दी। मंगल गीतों के साथ फूलों की बौछार की गई। बारात के पहुंचने पर माता कौशिल्या समेत तीनों रानियों ने आरती उतारी। लीला का भावपूर्ण मंचन देख लोग भावविभोर हुए।
विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के सातवें दिन बुधवार को जनकपुर में खिचड़ी की रस्म से लीला की शुरूआत हुई। इस रस्म के दौरान ही नृत्य की प्रस्तुति भी हुई। इसके बाद महाराज दशरथ द्वारा महाराज जनक से बारात की विदाई की अनुमति मांगने के बाद बारात अयोध्या के लिए रवाना होती है। वहीं अयोध्यावासी पलकें बिछाए बारात के लौटने का इंतजार कर थे। हर कोई बारात का स्वागत करने को तैयार नजर आता है। बारात के पहुंचने पर तीनों माताएं आरती करती है। पालकी का पट खुलते ही जयघोष होने लगता है। माताएं अपनी बहुओं को राजमहल में ले जाती हैं। चार सिंहासनों पर राजकुमारों और बहुओं को बैठाया जाता है।
राजा दशरथ अपनी रानियों से कहते हैं कि बहुओं को आंखों की पलकों पर बिठा कर रखना। विश्वामित्र राजा दशरथ से विदा मांगते हैं। इतने में राजा विश्वामित्र के चरणों में गिर पड़ते हैं। इसके बाद विश्वामित्र दशरथ को आशीर्वाद देकर आश्रम की ओर चल जाते हैं। शयन की नयनाभिराम झांकी के साथ लीला का समापन होता है। इस दौरान सैकड़ों लीला प्रेमी मौजूद थे। काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह लीला के दौरान उपस्थित थे। शाम को उनके लीला स्थल पर पहुंचने के बाद लीला शुरू हुई।