बैरवन गांव के गेंदे की पौध मिर्जापुर, सोनभद्र, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, गोंडा, चंदौली, भदोही, गाजीपुर, फतेहपुर, बहराइच समेत पूर्वांचल के सभी जिलों के साथ ही बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड के साथ-साथ नेपाल की राजधानी काठमांडो और बांग्लादेश के ढाका तक भेजी जाती है। देश-विदेश के फूल उत्पादकों की पहली पसंद बन चुका ब्रांड बैरवन गेंदा आज गांव की महिलाओं की मेहनत का प्रमाण है।
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महिलाओं का कहना है कि इसी खेती से बच्चों की पढ़ाई हो पा रही है और घर की जरूरतें पूरी हो रही हैं। गांव की पूरी आर्थिकी गेंदे के फूलों पर टिकी है और इसमें महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है। इसी गांव के रहने वाले डॉ. विजय वर्मा ने बताया कि इस गांव की औरतें गेंदे के पौध बेचकर इतना कमा लेती हैं जितना कोई शिक्षक भी नहीं कमा पाएगा।