यासुब भी वाराणसी से कई नेशनल खेल चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी नूर आलम भी भारत का कई मंच पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। फिलहाल उनके बेटे हसन आलम स्पेनिश बी डीवीजन क्लब से फुटबॉल खेलते हैं। हालांकि, इतने खिलाड़ी निकलने के बाद भी यहां सबको बेनिया मैदान के छोटे होने का मलाल है। खिलाड़ियों ने कहा कि बनारस में एक अच्छे मैदान की जरूरत है।
फुटबॉल कोच शम्सी रजा प्री-ओलंपिक खेल चुके हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर 1995 में पाकिस्तान के खिलाफ पेशावर में न सिर्फ मैच खेला था बल्कि स्कोर करने में कामयाब हुए थे। इनके अलावा एक गोल स्टार फुटबॉलर वाइचुंग भुटिया ने किया था। यह मैच भारत ने 2-1 से जीता था। शम्सी ने बताया कि पहले यह मैच लाहौर में होना था लेेकिन बाद में पेशावर में हुआ। तनाव के बीच उस मैच में दर्शक नहीं थे पूरे मैदान में केवल पुलिस और कमांडो तैनात थे। इसके बावजूद हमारे अंदर जीत का जुनून था।
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पुलिस के साफे से बनावाई थी शर्ट
नूर आलम ने बताया कि गुलामी के दौर में अंग्रेजी हुकूमत के आला अधिकारी ने खिलाड़ियों को बिना टीशर्ट के फुटबॉल खेलते देखा। इस पर अंग्रेज अफसर ने पुलिस लाइन से सिपाहियों के सिर पर बांधे जाने वाले लाल रंग के साफे से 30 खिलाड़ियों के लिए लाल रंग की शर्ट बनवाई थी। आज भी बेनिया के खिलाड़ी वही लाल रंग की जर्सी पहनकर फुटबॉल खेलते हैं।