डॉ. अमित उपाध्याय ने बताया कि प्रोजेक्ट में यह भी देखा जाएगा कि इन सिक्कों के निर्माण में प्रयुक्त चांदी कहां से लाई जाती थी और इन सिक्कों के निर्माण में कौन सी तकनीक शामिल थी। प्रारंभ में इस प्रोजेक्ट का दायरा उत्तर प्रदेश से प्राप्त सिक्के ही हैं, जिसे भविष्य में और विस्तृत किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों जैसे काशी, मथुरा, पांचाल, अयोध्या से प्राप्त सिक्कों का तुलनात्मक अध्ययन कर उन पर प्राप्त प्रतीक चिह्नों की ऐतिहासिक व्याख्या भी की जाएगी। अध्ययन के दौरान हम यह जान पाएंगे कि इन्हें किस टकसाल से जारी किया गया है और इनकी प्राचीनता क्या है। साहित्यिक साक्ष्यों मुख्य रूप से वैदिक ग्रंथों में प्राप्त संदर्भों से इनकी पुष्टि भी होगी।