इसके बाद यूजी वालों ने ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग को चौथी और एसिंक्रोनस लर्निंग को पांचवीं प्राथमिकता दी। एसिंक्रोनस का अर्थ है कि अपनी सुविधानुसार किसी भी समय रिकॉर्डेड लेक्चर और डिजिटल अध्ययन सामग्री से पढ़ाई की जाए। पीजी के छात्रों ने ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग को तीसरी, मोबाइल लर्निंग को चौथी और एसिंक्रोनस लर्निंग को पांचवीं वरीयता दी है।
बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान में अध्ययन में खुलासा हुआ है। बताया गया है कि पढ़ाई के पांच विकल्पों पर छात्रों ने अपनी वरीयता सेट की। अध्ययन से पता चलता है कि विद्यार्थी ई-लर्निंग की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान से सुमन रॉय, सैकत माजी, श्रुति मिश्रा और अभिषेक कुमार की ओर से किया गया रिसर्च इंडियन जर्नल ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन में प्रकाशित हो चुका है।
शैक्षणिक सत्र 2024-25 में 132 स्नातक और परास्नातक छात्रों पर पांच मानकों पर सर्वे किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने ई-लर्निंग के पांच प्लेटफॉर्म को वरीयता दी। छात्रों की उपलब्धता और पहुंच, लागत, संवाद-सहभागिता, सूचना व संचार प्रौद्योगिकी की उपलब्धता और शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर अध्ययन किया गया।
तकनीकी सुविधाओं से बढ़ी निर्भरता
ई-लर्निंग पर बढ़ती निर्भरता के पीछे दो बड़ी वजहें ऑनलाइन शिक्षा के लिए तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता और एकेडमिक क्वालिटी यानी कि पढ़ाई की गुणवत्ता रही। इसके बाद पहुंच, तालमेल और लागत का स्थान रहा। विश्वविद्यालयों को डिजिटल शिक्षा का ऐसा ढांचा तैयार करने में मदद मिल सकती है, जो विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों और सीखने की क्षमता के अनुरूप हो।
दो तकनीक को मिलाकर किया गया विश्लेषण
विश्लेषण के लिए दो तकनीक को मिलाकर अध्ययन किया गया। इसमें एक एनालिटिकल हाईरारिकी प्रोसेस (एएचपी) और दूसरी टेक्निक फॉर ऑर्डर प्रिफरेंस बाई सिमिलैरिटी टू आईडियल सॉल्यूशन (टॉप एसआईएस) तकनीक थी। एएचपी तकनीक का इस्तेमाल विशेषज्ञों की राय और टॉप एसआईएस के माध्यम से विद्यार्थियों के वास्तविक अनुभव और मूल्यांकन को जांचकर ई-लर्निंग के विकल्पों की रैंकिंग तैयार की गई।