यातायात सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट लगाकर न चलने वालों पर तो तत्काल कार्रवाई होती है लेकिन बाइक चलाते समय पुलिसकर्मी हेलमेट क्यों नहीं लगाते हैं? किसी भी घटना के बाद देर से पहुंचना कितना उचित है? पुलिस किसी की बात को गंभीरता से क्यों नहीं सुनती है? मामलों को हल करने में क्या जान-बूझकर देरी की जाती है?
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शुक्रवार को अग्रसेन कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में छात्राओं ने कुछ इसी तरह के सवाल पूछे। कार्यक्रम में मौजूद सीओ यातायात संतोष मिश्र ने बखूबी जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं को हर समय पुलिस के साथ होने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि किसी बात से डरने की जरूरत नहीं है।
कार्यक्रम में छात्राओं में गजब का उत्साह दिखा। इस दौरान इंटरमीडिएट की छात्रा प्रेरणा अग्रवाल ने सड़क पर चलने वालों का बिना हेलमेट के चालान करने के मामले को उठाया। पूछा कि ऐसा करने वाले पुलिस कर्मियों का क्यों नहीं चालान होता है? नौशीन सिद्दीकी ने कहा कि प्राय: देखा जाता है कि गुमशुदगी पर पुलिस द्वारा संजीदगी से कार्रवाई नही की जाती है। फरहत जबी ने अपहरण के मामले में भी पुलिस की लेटलतीफी का मुद्दा रखा। संजना प्रजापति का सवाल था कि पुलिस की ओर से सुरक्षा का भरोसा दिलाने के बाद भी लोग असुरक्षित क्यों महसूस करते हैं? सिमरन सिंह ने जानना चाहा कि पुलिसकर्मी ऑटो में बैठते हैं तो किराया क्यों नहीं देते हैं?
शिक्षक कीर्ति सिंह ने सड़क दुघर्टना के समय किसी को अस्पताल ले जाने के बाद वहां पूछताछ और पुलिस केस की समस्या को प्रमुखता से रखा। आशा अग्रवाल ने लाख प्रयास के बाद पुलिस पर भरोसा न होने और प्रशांत शुक्ला ने नेताओं का फोन आने पर आरोपी-अपराधी को छोड़ देने का सवाल पूछा। जवाब में सीओ यातायात ने कहा कि पुलिस पर भी वही कानून लागू होता है जो आम लोगों पर।
मामलों के निस्तारण में लेटलतीफी की बात हैं तो समय से निस्तारण न होने पर वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर सूचना दी जा सकती है। सभी के मोबाइल नंबर वेबसाइट पर हैं। किसी भी घटना पर 100 नंबर पर तुरंत सूचना दें। इस दौरान उन्होंने छात्राओं और शिक्षकों को साइबर क्राइम जैसे अन्य अपराधों से सावधान रहने के उपायों की भी जानकारी दी। इस दौरान कॉलेज के प्रबंधक आमोद अग्रवाल सहित सभी िश्ाक्षक मौजूद रहे।