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छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़: वाराणसी में ब्लैक लिस्टेड होने के बावजूद सड़कों पर बैखौफ दौड़ रहे स्कूली वाहन

Wed, 27 Apr 2022 03:31 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

वाराणसी में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही देखने को मिल रही है। यहां करीब 400 स्कूली वाहन ब्लैक लिस्टेड होने के बाद भी बिना किसी रोक टोक के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सांठगांठ के खेल के जरिए चल रहे ये वाहन अफसरों की पकड़ से काफी दूर हैं।   
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सड़कों पर बैखौफ दौड़ रहे ब्लेैक लिस्टेड स्कूली वाहन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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परिवहन विभाग की शह पर स्कूल प्रबंधन पीले रंग की आड़ में अनफिट और खटारा वाहनों के जरिए बच्चों को ढो रहे हैं। करीब 400 स्कूली वाहन ब्लैक लिस्टेड होने के बावजूद सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं और परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम बेखबर है।

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जिले भर में 237 स्कूलों की 2,538 बसें पंजीकृत हैं और इसमें 229 बसों की फिटनेस नहीं हो पाई है। इसके अलावा 117 बसें अपनी 15 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकी हैं और इसके बावजूद वह स्कूलों में बच्चों को लेकर सड़क पर दौड़ रही हैं।

दरअसल, वाराणसी में अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल संचालक गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। वे अनफिट स्कूली वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। ऐसे में घर से स्कूल और स्कूल से घर तक बच्चे आशंका के बीच सफर तय करने को मजबूर हैं।

जिले में कुल 177 सीबीएसई और 60 माध्यमिक स्कूलों के वाहन परिवहन विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें मिनी बस, बस व टैक्सी आदि गाड़ियां शामिल हैं। बीते दो वर्षों में कोरोना महामारी के बीच स्कूल बंद होने से 229 वाहनों की फिटनेंस की वैद्यता समाप्त हो गई है। नए सत्र में सभी स्कूल फिर पूरी क्षमता के साथ संचालित किए जा रहे हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उक्त वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया है।

यहां बता दें कि बीते दिनों गाजियाबाद में हुए स्कूल बस हादसे के बाद भी वाराणसी के स्कूल प्रबंधन कोई सबक लेने को तैयार नहीं हैं। उधर, अपर मुख्य सचिव गृह के निर्देश के बाद परिवहन विभाग अनफिट वाहनों के संबंध में कई स्कूलों के प्रबंधन को नोटिस भेजा है। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही इन वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया तो इन वाहनों को सीज करके कठोर कार्रवाई की जाएगी।

ज्यादातर स्कूलों में मनमानी, निगरानी करने वाला कोई नहीं

वाराणसी के ज्यादातर स्कूलों में प्रबंधन मनमानी करते हुए वाहनों में निर्धारित सीट से ज्यादा बच्चों को बैठाते हैं। आधे से ज्यादा बच्चे बैठने की बजाय खड़े रहते हैं। इसके अलावा स्कूली बच्चों के लिए प्रतिबंधित आटो, मैजिक, विक्रम समेत अन्य छोटे वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है।
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यह हैं स्कूल वाहन के लिए सामान्य मानक

- स्कूल वाहन की खिड़कियों पर ग्रिल और जाली लगी हो।
- आग से बचाव के लिए वाहन में अग्निशमन यंत्र लगा हो।
- बस के पीछे स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा हो।
- दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह हो।
- चालक को कम से कम पांच साल का अनुभव व लाइसेंस और ट्रांसपोर्ट परमिट अवश्य हो।
- स्कूल वाहन पीले रंग से पेंट हो।
- बस में आपातकालीन निकासी द्वार हो।
- बस या स्कूल वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स हो।
- बस में प्रेशर हार्न या मल्टीटोन हार्न नहीं हो।
- सभी सीटों पर सीट बेल्ट हो।
- लोकेशन ट्रेसिंग डिवाइस और सीसीटीवी कैमरा लगा हो।

बेखबर एआरटीओ प्रवर्तन, चार स्कूली वाहन सीज

वाराणसी में एआरटीओ प्रवर्तन के चार पद हैं, मगर यहां एक ही पद पर यूबी सिंह तैनात है। स्कूल और अभिभावक संघ के सदस्यों का आरोप है कि एआरटीओ प्रवर्तन न तो किसी का फोन उठाते हैं और न किसी शिकायत का संज्ञान लेते हैं। जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम सड़कों पर नहीं उतरी। हालांकि यात्रीकर अधिकारी केकी मिश्रा ने चार स्कूली वाहन सीज किए और 12 के चालान किए। इसमें सात वाहन बिना फिटनेस और इंश्योरेंस के ही 2018 से चल रहे थे।

अनफिट स्कूली बसों की रिपोर्ट तलब की

परिवहन विभाग के साथ ही सातों संयुक्त टीमों से अवैध बस, अनफिट स्कूली बसों की रिपोर्ट तलब की गई है। कार्रवाई के बाद प्रमाण के साथ ही ब्योरा मांगा गया है। एडीएम स्तर के अधिकारियों को समीक्षा में लगाया गया है। लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी
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