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काशी विद्यापीठः छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर पांच ने पेश की दावेदारी 

Sat, 06 Oct 2018 12:19 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव के लिए शुक्रवार को ऑनलाइन नामांकन किया गया। नामांकन के लिए अध्यक्ष पद पर पांच ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया।
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वहीं महामंत्री पद पर तीन और उपाध्यक्ष व पुस्तकालय मंत्री पद पर सात-सात उम्मीदवारों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया। इस तरह प्रमुख चार पदों पर कुल 22 ने नामांकन किया। वहीं संकाय प्रतिनिधि पद के लिए 17 ने पंजीकरण कराया।

काशी विद्यापीठ में 14 अक्तूबर को छात्रसंघ चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर शुक्रवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक हुए पंजीकरण के तहत प्रमुख पदों पर 22 ने और संकाय प्रतिनिधि पद पर 17 ने पंजीकरण कराया।
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शनिवार को नामांकन पत्र के साथ मूल प्रमाण पत्रों का सत्यापन होगा। सुबह नौ बजे दोपहर दो बजे तक प्रत्याशी अपने प्रस्तावक और समर्थक संग प्रमाण पत्रों की जांच के लिए पहुंचेंगे। नामांकन जुलूस को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मानविकी संकाय समेत पूरे परिसर में बैरिकेडिंग कर दी गई है।

सुरक्षा व्यवस्था और रूट डायवर्जन के मद्देनजर शाम साढ़े छह बजे पुलिस प्रशासन के साथ विश्वविद्यालय के अधिकारियों व प्रत्याशियों के साथ बैठक भी हुई। बैठक में प्रत्याशियों को दिशा निर्देश दिए गए हैं। प्रत्याशियों को एक सीमित समय और स्थान निर्धारित किया गया है जिसमें वो अपना जुलूस निकाल सकेंगे और नामांकन करेंगे। 

इन्होंने किया ऑनलाइन पंजीकरण 

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अध्यक्ष : राजमंगल पांडेय, संदीप कुमार यादव, विकास पटेल, अंबिका प्रसाद, बीरेंद्र कुमार मौर्य
उपाध्यक्ष : आशु कुमार वर्मा, प्रीत सौरभ मिश्र, पवन कुमार यादव, राजन कुमार यादव, इजहार हाशमी, राहुल साहनी, शिवम कुमार 
महामंत्री : अंशु कुमार मिश्रा, दिगवंत पांडेय, अजय पटेल
पुस्तकालय मंत्री : अंकित कुमार बेनवंशी, पवन कुमार सिंह, विनय मौर्य, आकाश कुमार गुप्ता, राज किरण कुमार मौर्य, रोश कुमार राय, पंकज कुमार शर्मा
संकाय प्रतिनिधिः मानविकी संकाय - दो, समाज विज्ञान - चार, शिक्षा - दो, वाणिज्य व प्रबंधशास्त्र - दो, समाजकार्य - तीन, विधि - एक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - तीन 

सीओ चेतगंज के नेतृत्व में कैंपस में चला चेकिंग अभियान

काशी विद्यापीठ में फोर्स - फोटो : amar ujala
काशी विद्यापीठ में शुक्रवार को भी चेकिंग अभियान चला। सीओ चेतगंज अंकिता सिंह और कुलानुशासक प्रो. शंभु उपाध्याय के नेतृत्व में पुलिस व प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम ने मानविकी संकाय से लेकर सामाजिक विज्ञान संकाय, समाज कार्य संकाय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय समेत सभी संकायों व विभागों में जाकर चेकिंग की। इस दौरान भी कई बाहरी लोगों को खदेड़ा गया।

सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर और आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशी व उनके समर्थकों पर नजर रखी जा सके इसके लिए परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। उधर, छात्रसंघ चुनाव को लेकर उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। कक्षाओं में जाकर उन्होंने चुनाव प्रचार किया।

हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लगातार उम्मीदवारों से अपील की जाती रही कि कक्षा संचालन में कोई बाधा उत्पन्न न की जाए लेकिन समर्थक कक्षाओं में जा-जाकर चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार तेजी से चल रहा है। व्हाट्स एप फेसबुक पर लगातार वोट की अपील की जा रही है। 
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बनारस के गलियारे में गुमनाम हुए छात्रसंघ के सितारे 

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स्वाधीनता आंदोलन से काशी विद्यापीठ में सियासत के अंकुर बिखर गए थे। यहां के छात्र तो देश प्रदेश की राजनीति का कद्दावर चेहरा बने लेकिन छात्रसंघ के पदाधिकारी राजनीति में कुछ खास दम नहीं दिखा सके हैं।

रामकृष्ण हेगड़े, अलगू राय, राम किशुन यादव, अवधेश सिंह जैसे गिने चुने नामों के बाद कोई छात्रनेता राजनीति में अपनी पहचान नहीं बना सके। वैसे यहां पहला छात्रसंघ चुनाव जीतने वाले विजय नारायण भी लंबी सियासी पारी नहीं खेल सके थे।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव का बिगुल बज गया है। यहां 14 अक्तूबर को छात्रसंघ चुनाव होने हैं। स्वाधीनता आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने के साथ ही काशी विद्यापीठ ने राजनीति में भी अलग पहचान बनाई। इस विश्वविद्यालय ने देश को कई कद्दावर नेता, जनप्रिय और जुझारू नेता दिए।

इसमें लाल बहादुर शास्त्री, पंडित कमलापति त्रिपाठी, प्रो. राजाराम शास्त्री, मनमथनाथ गुप्त और रामकृष्ण हेगड़े, कलराज मिश्र जैसे राजनेता शामिल हैं जिनकी राजनैतिक सूझबूझ का लोहा विरोधी भी मानते थे, पर यह गौरवशाली परंपरा अब करीब खत्म सी हो गई है। ये नाम भी वो हैं जिन्होंने यहां की छात्र राजनीति में तो हिस्सा नहीं लिया, लेकिन यहां के छात्र के तौर ये नाम कमाया है।

काशी विद्यापीठ के राजनीति शास्त्र विभाग के प्रोफेसर रहे प्रो. सतीश राय कहते हैं कि विधायक अवधेश सिंह को छोड़कर छात्रसंघ पदाधिकारी के तौर पर कोई नाम याद नहीं आता। कहते हैं वर्तमान समय में क्वालिटी लीडरशिप की कमी है। छात्रों को राजनीतिक प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता। छात्र राजनीति में भी जाति और आर्थिक क्षमता को देखकर उन्हें टिकट दिया जा रहा है। यही वजह है कि आज के दौर के छात्रनेता देश की राजनीति के फलक तक नहीं पहुंच पा रहे। 
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