प्रधानमंत्री ने दिल्ली को एलईडी से जगमग करने की योजना की शुरुआत की है लेकिन उनका संसदीय क्षेत्र भी इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहता है। काशी की गलियां, घाटों और घर लाइट एमिटिंग डायोड (एलईडी) बल्ब की दूधिया रोशनी से जगमग होंगे।
नगर निगम से सार्वजनिक स्थलों के हेलोजन और नियान लाइट को एलईडी स्ट्रीट लाइटों से बदलने की तैयारी है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने टंगस्टन और सीएफएल बल्ब को एलईडी बदलने की योजना बना ली है। बस इंतजार है तो सिर्फ विद्युत नियामक आयोग से हरी झंडी मिलने का। उम्मीद है कि जनवरी के मध्य तक इसकी अनुमति मिल जाएगी और महीने के आखिर तक बल्ब लगने लगेंगे।
बिजली विभाग बनारस में उपभोक्ताओं को पुराने बल्ब और दस रुपये देने पर एलईडी बल्ब मुहैया कराएगा। बाद में हर महीने दस-दस रुपये प्रति बल्ब की दर से उपभोक्ताओं से शेष रकम की वसूली की जाएगी। इसके अलावा कोई नकद एलई़डी लेना चाहे तो उसे लगभग 180 रुपये में बल्ब दिए जाएंगे।
पहले विभाग ने किलोवाट तक के उपभोक्ताओं को तीन और उससे ज्यादा के उपभोक्ताओं को पांच बल्ब देने की योजना बनाई थी। अब इसे बढ़ा दिया गया है। दो किलोवाट तक विद्युत भार वाले उपभोक्ताओं को पांच-पांच और उससे ज्यादा भार होने पर दस-दस बल्ब दिए जाएंगे।
केंद्र सरकार की एजेंसी इलेक्ट्रिक इफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) ने एलईडी बल्ब मुहैया कराने की संस्तुति दे दी है। इस आशय का पत्र सोमवार को प्रबंध निदेशक डा. काजल को प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि महीने के अंत तक एलईडी बल्बों को वितरण की योजना है। शासन ने स्ट्रीट लाइटों के लिए भी नगर निगम के अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना बनाकर भेजने को कहा गया है।
नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि शहर में 23 हजार से ज्यादा स्थानों पर स्ट्रीट लाइट्स जलती हैं। इसके लिए विभाग को सालाना एक करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता है। एलईडी लग जाने पर यह खर्च एक चौथाई से भी कम हो जाएगा।