कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा श्री काशी विश्वनाथ के चित्र पर पुष्प अर्पित और दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ। डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने कहा कि ज्ञानवापी मुद्दा शुरू से केवल मंदिर मस्जिद विवाद की तरह देखा जाता रहा है जबकि वस्तुतः यह विषय सहिष्णु समाज के ऊपर आक्रांता मानसिकता द्वारा किए गए सांस्कृतिक हमले के रूप में देखा जाना चाहिए। ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद इसके लिए संघर्ष कर रही है।
अधिवक्ता मान बहादुर सिंह एवं अनुपम द्विवेदी ने कहा कि ज्ञानवापी का मुकदमा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है अतः सभी पक्षकारों को हिंदू समाज के हित में एकता के भाव से इस मुकदमे में सहयोग करना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन संयोजक राजा आनंद ज्योति सिंह ने किया। संचालन सह संयोजक पतंजलि पांडेय ने किया। अतिथियों का सम्मान अभिषेक निगम ने किया। इस दौरान बाला लखेंद्र जय प्रकाश, अश्विनी कुमार, सत्यम मिश्र, डॉ. उपेंद्र विनायक सहस्रबुद्धे आदि उपस्थित थे।