गले लगाकर अनुराग को आशीर्वाद देते उनके मौसा भुल्लन पटेल।
मुश्किलें बहुत थीं, संसाधन भी कुछ खास नहीं थे। कुछ था तो वो हौसला था, कुछ कर दिखाने का जुनून था और मेहनत थी। अपने फौलादी इरादों की बदौलत अनुराग सिंह पटेल और रितेश सिंह ने अभावों और चुनौतियों के अंधेरे को चीरकर सफलता की रोशनी बिखेरी है। साथ ही, पूरे जिले को खुश होने का एक मौका दे दिया है। अपनी लगन और मेहनत से काशी का मान बढ़ाने वाले इन होनहारों ने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति और कठिन हालात के बावजूद यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा में बुलंदी के आसमान को चूमा। जिले में पहला स्थान हासिल करने वाले अनुराग सिंह पटेल के पिता साधारण किसान हैं जबकि रितेश के पिता होमगार्ड हैं।
अंधेरे में चमकने का हुनर जानने वाले इन होनहारों ने चुनौतियों, अभावों से पस्त होना कुबूल नहीं किया बल्कि उसे अपनी ताकत बनाई। चंदौली विसुनपुर निवासी अनुराग सिंह पटेल को 94.6 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। सनातन धर्म इंटर कॉलेज के छात्र अनुराग के पिता कौशल सिंह पटेल परिवार के गुजारे के लिए खेती-बारी करते हैं। बेटे की सफलता पर उनकी आंखें नम हो आईं। कहा कि दो साल पहले अनुराग ने इससे पहले हाईस्कूल में जिले में टॉप किया था। अब इंटरमीडिएट में भी उसकी मेहनत रंग लाई है। आईआईटी मेंस में भी अनुराग ने सफलता पाई है। उनका सपना आईएएस बनने का है।
अनुराग के ही दोस्त सहपाठी रितेश सिंह 94 प्रतिशत अंकों से जिले के दूसरे टॉपर रहे। अनुराग से उनके मात्र तीन अंक कम हैं। अनुराग के पिता विनोद सिंह होमगार्ड हैं। बेटे की इस सफलता पर पूरा परिवार गौरवान्वित है लेकिन पिता की खुशी का तो जैसे कोई ठिकाना नहीं। मां रेखा सिंह भी बेटे पर निहाल थीं। रितेश साइंटिस्ट बनना चाहता है। रितेश का कहना है कि अगर मेहनत दिल से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। फिलहाल उनका फोकस अपने लक्ष्य पर है। वह साइंटिस्ट बनकर देश्ा की सेवा करना चाहते हैं। बता दें कि रितेश ने हाईस्कूल में जिले में सातवां स्थान हासिल किया था। एक खास बात यह है कि अनुराग और रितेश दोनों अच्छे दोस्त हैं। एक ही कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। प्रतिस्पर्धा हमेशा रही लेकिन हमेशा इसे सकारात्मक रूप में लिया।