बीएचयू शिवाजी हॉल में कुश्ती का अभ्यास करता दिनेश। संवाद
वाराणसी। आयर क्षेत्र के हरदासपुर निवासी पहलवान को पूर्वांचल ही नहीं प्रदेश में भी प्रसिद्धि मिली है। दिनेश यादव के परिवार में कोई भी कुश्ती का खिलाड़ी नहीं है। उन्होंने दुधिया को देखकर शारीरिक अभ्यास शुरू किया। आठ साल की उम्र में मुनारी अखाड़े पर इनामी दंगल लड़ा, जो कि बराबरी पर छूटा। पांच रुपये बतौर पुरस्कार मिले। अब तक 26 पदक जीत चुके दिनेश यादव अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता में खेलेंगे।
उन्होंने 2012 में कुश्ती लड़ना शुरू किया। इसके एक साल बाद उनका चयन गोरखपुर स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए हो गया। छह साल तक स्पोर्ट्स कॉलेज की ओर से नौ राष्ट्रीय मुकाबलों के अलावा प्रादेशिक में 17 पदक हासिल किए। 2023 में स्पोर्ट्स कोटे से कला संकाय में चयन हो गया। फिलहाल हिंदी में ऑनर्स कर रहे हैं। बताया कि बागपत में प्रादेशिक मुकाबले में खेलने जाना था, लेकिन पढ़ाई की वजह से नहीं जा सके। फिलहाल पांचवें समेस्टर की परीक्षा की तैयारी करने के साथ खेल को भी समय दे रहे हैं। बीएचयू के विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के सहायक निदेशक और कुश्ती कोच डॉ. हरेराम यादव ने बताया कि दिनेश रोज दो सत्र में पांच घंटे अभ्यास करते हैं। दिनेश ने वाराणसी के अलावा प्रदेश में 18 चैंपियन का खिताब अपने नाम किया है।