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वाराणसी: श्री काशी नाटकोट क्षेत्रम सोसायटी करेगी महारुद्रम का होगा आयोजन, जमीन पर अतिक्रमण हटने के बाद संवरेगा बाग

Tue, 10 May 2022 04:57 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

श्री काशी विश्वनाथ की शाम की आरती में दो सौ साल से भी ज्यादा समय से प्रसाद चढ़ाने वाली श्री काशी नाटकोट क्षेत्रम सोसायटी की जमीन से अवैध कब्जा हटने के बाद इस पर महारुद्रम का होगा आयोजन किया जा रहा है। आयोजन में 108 ब्राह्मण शामिल होंगे। 
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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श्री काशी नाटकोट क्षेत्रम सोसायटी की जमीन से अवैध कब्जा हटाने के बाद सोसायटी फिर से धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत करने जा रही है। इस जमीन पर बने प्राचीन शिव मंदिर में महारुद्रम कराने की तैयारियां चल रही हैं। आयोजन में 108 ब्राह्मण शामिल होंगे और जमीन पर बाबा विश्वनाथ को चढ़ाने के लिए फूलों का बागीचा भी तैयार किया जाएगा।

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सोसायटी के वाराणसी में अध्यक्ष पाला रामास्वामी ने बताया कि 2003 में अवैध एग्रीमेंट के जरिए समिति की जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। पुलिस ने जमीन को मुक्त करा दिया है और अब वहां साफ-सफाई कर उसे व्यवस्थित किया जा रहा है। बाबा श्री काशी विश्वनाथ के मंदिर में होने वाली भोग आरती का जिम्मा दक्षिण भारत का चेट्टियार समुदाय उठा रहा है। 

इस परंपरा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए 1963 में अगस्तकुंडा में श्री नाटकोट क्षेत्रम ट्रस्ट के नाम से एक बड़े भवन का निर्माण कराया और भवन के अंदर शिव का मंदिर बनवाया गया। इसी जगह से बाबा दरबार को जाने वाली डलिया सजाई जाती है। नित्य सुबह 11 बजे और शाम को 8 बजे ब्राह्मण दल इसे मंदिर ले जाते हैं। चांदी की डलिया में बाबा का भोग तो डलिया में पूजा सामग्री। वहीं चांदी के घड़े में गंगा जल और साथ एक बक्सा जिसमें अन्य पूजा के समान रहते हैं। 
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पुलिस ने कराया था कब्जे से मुक्त
दक्षिण भारत की सोसायटी श्रीकाशी नाटकोट क्षेत्रम की 240 करोड़ रुपये की जमीन को पुलिस ने रविवार को कब्जा मुक्त कराया था। 62 हजार वर्ग फीट जमीन पर बगीचा था। इसके फूल श्री काशी विश्वनाथ को चढ़ाए जाते थे, लेकिन कब्जा करने वाले इसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे थे। जमीन वापस मिलने के बाद सोसायटी के लोगों ने सफाई के साथ प्राचीन शिव मंदिर में परंपरागत तरीके से पूजा पाठ भी शुरू किया।

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कारइकुड़ी में है नाटकोट क्षेत्रम का मुख्य कार्यालय
श्रीकाशी नाटकोट क्षेत्रम का मुख्य कार्यालय तमिलनाडु के शिवगंगा के कारइकुड़ी में है। बनारस में इसका कार्यालय गोदौलिया में है।

1813 से होती है आरती
वर्ष 1813 में तीनों आरती की पूजा सामग्री मानसरोवर स्थित कुमार स्वामी मठ से विश्वनाथ मंदिर ले जाई जाती थी। काशी विश्वनाथ में प्रतिदिन पांच आरती की जाती है, जिसमें एक आरती मंदिर न्यास के जिम्मे होती है। भोर में होने वाली मंगला आरती, मध्याह्न भोग आरती और रात्रि श्रृंगार भोग आरती का जिम्मा दक्षिण भारत का चेट्टियार समुदाय उठा रहा है।
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