इरी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि दुनिया भर में धान की कई प्रजातियों पर शोध चल रहा है। 50 प्रतिशत में तो इरी शोध कर रहा है। चावल को शुगर फ्री करने, प्रोटीन, जिंक, आयरन जैसे पोषक तत्वों में वृद्धि का शोध चल रहा है। इसे गति देने के लिए स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला को तैयार किया गया। निर्माण हो चुका है। फिनिशिंग चल रही है। अगले माह प्रधानमंत्री मोदी उद्घाटन कर सकते हैं।
स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला में बने दो बड़े और छह छोटे चेंबरों में क्रॉस की गई 17 हजार धान की प्रजातियों को रोपा जाएगा। जिनका विकास प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम रूप से तैयार रोशनी, हवा, पानी से किया जाएगा।
साधारण तौर पर पौधों के विकास में जिस तरह से सूरज की रोशनी में एक साथ सात रंग (लाल, हरा, नीला, पीला, बैगनी, आसमानी और नारंगी) खुली हवा, उमस, बारिश और बोरिंग के पानी का योगदान होता है। इसके विपरीत प्रयोगशाला में स्वीडन और जापान से लगाई गई एक से डेढ़ लाख रुपये की स्पेक्ट्रम लाइट (सतरंगी लाइट) के माध्यम से पौधों का विकास किया जाएगा।