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काशी के खास मंदिर: मल्लिकार्जुन मंदिर की सीढ़ियां 84 योनियों से देती हैं मुक्ति, श्रृंगी ऋषि ने किया था तप

Tue, 06 Aug 2024 03:01 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: भगवान शिव की नगरी काशी में हर स्थान पर शिवलिंग विराजमान है। इन्हीं में से एक है मल्लिकार्जुन महादेव। इनके दर्शन का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि पूर सावन भर इनके दर्शन-पूजन को भारी मात्रा में शिवभक्त आते रहते हैं। 
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मल्लिकार्जुन महादेव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कण-कण शंकर का अहसास कराने वाली काशी में भगवान शिव के स्वरूप भी विविध हैं। देव, दानव, मानव, ऋषिमुनि, यक्ष और गंधर्वों ने शिवलिंग स्थापित किया है। ऐसे ही द्वादश ज्योर्तिलिंग में प्रमुख मल्लिकार्जुन महादेव भी काशी में विराजमान हैं। इनके दर्शन-पूजन से मनुष्य को 84 योनियों की यात्रा से मुक्ति मिलती है। 

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शहर का सिगरा क्षेत्र श्रीशैल प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में श्रीपर्वत या श्रीगिरी के नाम से भी प्रसिद्ध है। श्रीगिरी (श्रीशैल) का अपभ्रंश ही वर्तमान वाराणसी का सिगरा क्षेत्र है। यहीं टीले पर मल्लिकार्जुन महादेव या त्रिपुरांतकेश्वर महादेव का मंदिर है।



मंदिर में जाने वाली 84 सीढि़यां मनुष्यों को 84 योनि के फेरों से मुक्त करती हैं। इस मंदिर की सीढि़यों के पास एक कृष्णाकूप है जिसे कृष्णा नदी का रूप कहा जाता है। इसी कूप के जल से भी बाबा का अभिषेक किया जाता है। कृष्णा नदी श्रीशैल पर्वत के पास से बहती हैं। 
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पुजारी बृजेंद्र कुमार ओझा ने बताया कि इस मंदिर को मल्लिकार्जुन और त्रिपुरांतकेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। शिवपुराण के अनुसार रामायण काल में यह शृंगी ऋषि का आश्रम था। भगवान शिव मल्लिकार्जुन स्वरूप में स्वयंभू विराजमान हैं। त्रिपुरान्तक लिंग (मल्लिकार्जुनेश्वर) के दर्शन करने से श्रीशैल शिखर के दर्शन करने के बराबर फल मिल जाता है।

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मंदिर के नीचे है सुरंग
मंदिर की खासियत यह है कि ऋषियों ने अपनी तप, साधना से गंगा की जलधारा को मल्लिकार्जुन महादेव मंदिर तक मोड़ दिया था। मंदिर के नीचे सुरंग है जो गंगा से जुड़ी हुई है। पुजारी ने बताया कि एक बार अंग्रेज इस सुरंग के रास्ते अंदर गए थे और फिर नहीं लौटे। तब से इस सुरंग को बंद कर दिया गया। मान्यता है कि इस मंदिर में महादेव रोज विश्राम करने आते हैं।

मां काली को चढ़ाई जाती है सोने या चांदी की जीभ
पुजारी ने बताया कि मंदिर में स्थापित मां काली के दर्शन पूजन और सोने व चांदी की जीभ चढ़ाने से वाणी दोष दूर होता है। ऐसी मान्यता है कि जिस भी बच्चे की वाणी लड़खड़ाती हो, तुतलाता हो तो यहां चांदी की जीभ चढ़ाने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। बुद्धि और ज्ञान के लिए भगवान गणेश को कापी और पेन चढ़ाने की मान्यता है।
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