सभी के मालिक स्वयंभू काशी विश्वेश्वर
वर्तमान में जो न्यास परिषद है वह सिर्फ मैनेजमेंट देखता है, वास्तविक मालिकाना हक लॉर्ड काशी विश्वेश्वर का ही इन सभी आराजी पर है। एएसआई ने जो सर्वे किया है, वहां कई स्थान पर ब्लॉकेज हैं।
मुख्य गुंबद के नीचे तहखाना है, वह तीन तरफ से बंद है और बहुत सा मलबा पड़ा है। ऐसे में पूर्व में सिविल जज सीनियर डिवीजन / फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश के मुताबिक सर्वे किया जाए।
उसके तहत मुख्य गुंबद से हटकर उसे कोई नुकसान पहुंचाए बगैर 4/4 की सुरंग बनाकर नीचे के तहखाने का रडार तकनीक से सर्वे किया जाए। चबूतरा के नीचे तहखाना है, उसके नीचे छुपाया गया एक कुआं भी है। उसमें शिवलिंग है, अरघा है या कुछ और है, यह सब एएसआई के विस्तृत सर्वे से ही पता चल सकता है।
इसके अलावा जहां भी सर्वे नहीं हुआ है, उन सभी स्थानों का सर्वे किया जाना चाहिए। वाद मित्र ने कहा कि जहां शिवलिंग जैसी आकृति मिली है उस स्थल को सुप्रीमकोर्ट ने सुरक्षित रखने को कहा है। ऐसे में उस स्थान को क्षति पहुंचाए बगैर जांच किया जाना आवश्यक है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वहां शिवलिंग है या फव्वारा है। काशी विश्वेश्वर को मालिकाना हक मिलने के साथ धार्मिक स्वरूप का निर्धारण हो सकेगा।
वाद मित्र रस्तोगी ने कहा कि इस अति प्राचीन वाद में आराजी नंबर 9130 पर स्थित विवादित ढांचा को ढहाना है और काशी विश्वेश्वर का मालिकाना हक घोषित होना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे छह माह में निर्णीत करने का आदेश स्थानीय अदालत को दिया है।