घमंड त्यागकर विनम्रता से जाएं महादेव के दर पर
मध्य प्रदेश के कथावाचक अभिराम दास ने कहा कि ईश्वर अनुभूति का विषय है। संपूर्ण प्रकृति उनका स्वरूप है। महादेव तो समस्त सृष्टि में विराजमान हैं। महादेव के दर पर जब भी जाएं, घमंड त्याग कर विनम्रता से जाएं। महादेव सारे दुःख दूर कर देंगे।
वह कज्जाकपुरा स्थित कुशवाहा अतिथि भवन में चल रही सात दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा एवं सवा लाख पार्थिव शिवलिंग पूजन के पांचवें दिन शिव महिमा का वर्णन कर रहे थे। अभिराम दास ने कहा कि भगवान शिव मृत्युलोक में निवास करते हैं। इसलिए महादेव को ही विश्वनाथ कहा जाता है।
अन्य किसी देव को विश्व नाम से संबोधित नहीं किया जाता। कथा का शुभारंभ यजमान राकेश पाठक ने व्यासपीठ के पूजन से किया। आरती में डॉ. प्रेम नारायण दुबे, सुधीर कुमार रस्तोगी (मुकुटवाले), डॉ. पवन कुमार शास्त्री, सियाराम मिश्रा, सुरेश प्रसाद पाण्डेय, दिनेश पांडेय शामिल रहे।
वहीं, शनिवार को 25 हजार पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हुआ और सविधि पूजन अर्चन के साथ अभिषेक किया गया। वेद मंत्रों की ध्वनि से आसपास का संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो गया। अभी तक 75 हजार से ज्यादा पार्थिव शिवलिंग पूजे जा चुके हैं।
मंथरा चरित्र ने अयोध्या, किष्किंधा और लंका जैसे तीन राज्य बरबाद कर दिए
कथा मर्मज्ञ पं. श्रीकांत शर्मा बालव्यास ने कहा कि प्रभु श्रीराम अत्यंत विशाल हृदय वाले हैं। उन्हें न अयोध्या का राजपाट बहुत सुख दे सरा और न ही वनवास दुख दे सका। मंथरा सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि वह एक चरित्र है। जो दूसरों के सुख से दुखी हो, दूसरे की संपत्ति देख जले वही मंथरा है।
हमें अपने जीवन की मंथरा से सचेत रहने की आवश्यकता है। मंथरा चरित्र ने अयोध्या, किष्किंधा और लंका जैसे तीन राज्य बरबाद कर दिए।
वह शनिवार को महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में श्री काशी सत्संग सेवा समिति की ओर से परमेश्वर लाल धानुका की स्मृति में चल रही दस दिवसीय श्रीरामकथा के छठवें दिन कथा का रसपान करा रहे थे। बालव्यास ने कहा कि राम करुणा के सागर हैं।
प्रभु श्रीराम का यही संदेश है कि क्रोध को जीतने के लिए प्रेम की ही आवश्यकता है, संपूर्ण जीवन का सार शांति ही है जो प्रेम भाव से ही संभव है। इस दौरान राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र जायसवाल, अधिवक्ता राजदीप मजूमदार, दुर्गा देवी धानुका, गणपत राय धानुका, राकेश भावसिंहका, अश्विनी केशरी, सुमन सिंह मौजूद रहीं।