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काशी के खास मंदिर: यहां शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी के एक साथ होते हैं दर्शन, दो भागों में बंटा है शिवलिंग

Sun, 28 Jul 2024 11:02 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: मंदिरों के शहर बनारस में शिवालयों के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो जाते हैं। ऐसे ही मंदिर में शामिल हैं केदारघाट पर विराजमान गौरी केदारेश्वर। सावन माह में इसके दर्शन का विशेष पुण्य-लाभ मिलता है। आइए जानते हैं मंदिर की विशेषता...
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गौरी केदारेश्वर महादेव का मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सबसे बड़े शैव भगवान विष्णु और सबसे बड़े वैष्णव भगवान शिव कहे जाते हैं। काशी के गौरी केदारेश्वर मंदिर में शैव और वैष्णव दोनों ही परंपरा एकाकार होती है। केदारघाट पर विराजमान गौरी केदारेश्वर मंदिर के शिवलिंग का स्वरूप एकदम अनोखा है। 

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यह शिवलिंग आमतौर पर दिखने वाले बाकी शिवलिंग की तरह न होकर दो भागों में बंटा है। मान्यता है कि एक भाग में भगवान शिव मां पार्वती के साथ तो दूसरे भाग में भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ भक्तों पर आशीष बरसाते हैं।

केदारेश्वर मंदिर शहर के प्राचीन पवित्र स्थलों में से एक है। कहा जाता है कि यहां का शिवलिंग स्वयंभू है। पौराणिक मान्यता के अनुसार ऋषि मांधाता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहां दर्शन दिए थे। 
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भगवान शिव ने वरदान देते हुए कहा था कि चारों युगों में इस शिवलिंग के चार रूप होंगे। सतयुग में नवरत्नमय, त्रेता में स्वर्णमय, द्वापर में रजतमय और कलयुग में शिलामय होकर यह भक्तों की हर शुभ मनोकामनाओं को पूर्ण करेगा।

मान्यता है कि केदारखंड में गौरी केदारेश्वर के दर्शन करने से केदारनाथ धाम के दर्शन का सात गुना अधिक पुण्य फल भक्तों को मिलता है। दो भागों में बंटा यह शिवलिंग हरिहरात्मक और शिवशक्तयात्मक स्वरूप अपने आप में अनोखा है। 

इनके दर्शन से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा के दर्शन व कृपा की प्राप्ति होती है। रानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर की व्यवस्था में सुधार कराया था।

शिवजी खुद आते हैं खिचड़ी खाने
मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं यहां भोग ग्रहण करने आते हैं। स्वयंभू शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध और गंगाजल के साथ ही भोग में खिचड़ी चढ़ाई जाती है। मंदिर की पूजन विधि भी बाकी मंदिरों की तुलना में अलग है। यहां बिना सिला हुआ वस्त्र पहनकर ही ब्राह्मण चार पहर की आरती करते हैं।

घमंड त्यागकर विनम्रता से जाएं महादेव के दर पर
मध्य प्रदेश के कथावाचक अभिराम दास ने कहा कि ईश्वर अनुभूति का विषय है। संपूर्ण प्रकृति उनका स्वरूप है। महादेव तो समस्त सृष्टि में विराजमान हैं। महादेव के दर पर जब भी जाएं, घमंड त्याग कर विनम्रता से जाएं। महादेव सारे दुःख दूर कर देंगे। 

वह कज्जाकपुरा स्थित कुशवाहा अतिथि भवन में चल रही सात दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा एवं सवा लाख पार्थिव शिवलिंग पूजन के पांचवें दिन शिव महिमा का वर्णन कर रहे थे। अभिराम दास ने कहा कि भगवान शिव मृत्युलोक में निवास करते हैं। इसलिए महादेव को ही विश्वनाथ कहा जाता है। 

अन्य किसी देव को विश्व नाम से संबोधित नहीं किया जाता। कथा का शुभारंभ यजमान राकेश पाठक ने व्यासपीठ के पूजन से किया। आरती में डॉ. प्रेम नारायण दुबे, सुधीर कुमार रस्तोगी (मुकुटवाले), डॉ. पवन कुमार शास्त्री, सियाराम मिश्रा, सुरेश प्रसाद पाण्डेय, दिनेश पांडेय शामिल रहे। 

वहीं, शनिवार को 25 हजार पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हुआ और सविधि पूजन अर्चन के साथ अभिषेक किया गया। वेद मंत्रों की ध्वनि से आसपास का संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो गया। अभी तक 75 हजार से ज्यादा पार्थिव शिवलिंग पूजे जा चुके हैं।
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मंथरा चरित्र ने अयोध्या, किष्किंधा और लंका जैसे तीन राज्य बरबाद कर दिए
कथा मर्मज्ञ पं. श्रीकांत शर्मा बालव्यास ने कहा कि प्रभु श्रीराम अत्यंत विशाल हृदय वाले हैं। उन्हें न अयोध्या का राजपाट बहुत सुख दे सरा और न ही वनवास दुख दे सका। मंथरा सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि वह एक चरित्र है। जो दूसरों के सुख से दुखी हो, दूसरे की संपत्ति देख जले वही मंथरा है। 

हमें अपने जीवन की मंथरा से सचेत रहने की आवश्यकता है। मंथरा चरित्र ने अयोध्या, किष्किंधा और लंका जैसे तीन राज्य बरबाद कर दिए।

वह शनिवार को महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में श्री काशी सत्संग सेवा समिति की ओर से परमेश्वर लाल धानुका की स्मृति में चल रही दस दिवसीय श्रीरामकथा के छठवें दिन कथा का रसपान करा रहे थे। बालव्यास ने कहा कि राम करुणा के सागर हैं। 

प्रभु श्रीराम का यही संदेश है कि क्रोध को जीतने के लिए प्रेम की ही आवश्यकता है, संपूर्ण जीवन का सार शांति ही है जो प्रेम भाव से ही संभव है। इस दौरान राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र जायसवाल, अधिवक्ता राजदीप मजूमदार, दुर्गा देवी धानुका, गणपत राय धानुका, राकेश भावसिंहका, अश्विनी केशरी, सुमन सिंह मौजूद रहीं।
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