लगता है लोटा-भंटा का विश्व प्रसिद्ध मेला
द्वापर काल में पांचों पांडव द्रौपदी के साथ यात्रा करते हुए रामेश्वर आए थे। उस दौरान यहां के राजा का पुत्र खो गया था। राजा ने पांचों पांडव से कहा कि हमारा खोया हुआ पुत्र मिल जाए या फिर हमें संतान सुख मिल जाए।
राजा का खोया हुआ पुत्र मिला और उन्हें संतान की प्राप्ति भी हुई। तभी से अगहन मास में विश्व प्रसिद्ध लोटा-भंटा मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि जो इस मेले में आएगा और वरुणा नदी में स्नान के बाद बाटी-चोखा बनाकर रामेश्वर महादेव को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करेगा और एक दिन प्रवास करेगा, उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी।