महंत आदित्यनाथ योगी के मुख्यमंत्री और फूलपुर के केशव प्रसाद मौर्य के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद पूर्वांचल की बल्ले-बल्ले तो हो गई है। मंत्रिमंडल में भी पर्याप्त महत्व मिला है लेकिन राजनीतिक रूप से सतर्क (अवेयर) पूर्वांचल का हर वर्ग नई सरकार से ऐसे प्रयासों और उपायों की उम्मीद कर रहा है, जिससे यहां की बेरोजगारी कम करने के लिए आधारभूत ढांचे का विकास किया जाए।
यहां के बाशिंदे प्रशासनिक सक्रियता (एक्टिव ब्यूरोक्रेसी) के अलावा भ्रष्टाचारमुक्त विकास (करप्शन-फ्री डेवलपमेंट) चाहते हैं। जानकारों की चिंता यहां के पिछड़ेपन (बैकवर्डनेस), संगठित अपराध (क्राइम) और जातीय जोड़तोड (कास्ट फैक्टर) को लेकर भी है।
पूर्वांचल की सबसे बड़ी समस्या यहां की नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) कार्रवाई (एक्टिव) करने वाली नहीं है। अब तक यहां केंद्र और राज्य के अलावा एक ही विभागों में आपसी समन्वय (कोआर्डिनेशन) की कमी रही है। ऐसे में यहां का अनुशासन और व्यवस्था (डिसिप्लिन एंड डेकोरम) ध्वस्त हो चुका है। इसी का नतीजा है कि सड़क, बिजली और पानी के साफ पानी जैसी बुनियादी समस्याओं से यहां के लोग रोजाना दो-चार हो रहे हैं।
पूर्वांचल का यह सर्वज्ञात पक्ष है कि यहां के लोग राजनीतिक रूप से परिपक्व हैं और वे हमेशा सही फैसला करते रहे हैं। 2007 में इस पूरी बेल्ट ने बसपा का साथ दिया था तो उम्मीदें पूरी न होने पर 2012 में सपा को हाथोंहाथ लिया।
अब तक की सरकारें यहां के संसाधनों का दोहन तो करती रही हैं, पर मतदाताओं का मान कभी नहीं रखा गया। भाजपा नेतृत्व ने चुनाव के पहले ही पूर्वांचल के ‘ मन की बात’ को पढ़ लिया और अपना दल (सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (भासपा) से तालमेल कर आजमगढ़ के अलावा ज्यादातर जिलों में सपा-बसपा का सूपड़ा साफ कर दिया।
चुनाव के परिणाम साबित करते हैं कि पूर्वांचल की जनता ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ की अलग-अलग परिभाषाओं और व्याख्याओं से ऊब कर भाजपा को एकमुश्त वोट दिए हैं।
वैसे यह कहने वालों की भी कमी नहीं है कि पूर्ववर्ती सपा सरकार ने विकास की जो परिभाषाएं गढीं, वे सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकीं। इसीलिए लोगो ने ‘प्रैगमैटिज्म’ यानी व्यवहारिक आधार पर वोट दिया।
बहरहाल ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे और पूर्वांचल विकास बोर्ड की स्थापना के वादे पर पर बनी सरकार से लोग ‘गुड गवर्नेंस’ के तहत प्राथमिक तौर पर कामकाज में पारदर्शिता आने और गुंडाराज से मुक्ति की अपेक्षा रखते हैं।