वाराणसी जिला पंचायत में समाजवादी पार्टी की अपराजिता सोनकर की कुर्सी बरकरार रहेगी। भाजपा की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कोरम के अभाव में गिर गया।
दरअसल दिन में 11 से 11:30 बजे तक सभी सदस्यों को जिला पंचायत सभागार में बैठक के लिए पहुंचना था। यह समय जिला प्रशासन की ओर से तय किया गया था। सपा नेता पहुंचे लेकिन वे जिला पंचायत भवन के बाहर ही रहे।
उनका कहना था कि चूूंकि अविश्वास प्रस्ताव भाजपा ने रखा है, ऐसे में वही दावा पेश करे। समय बीत गया लेकिन भाजपा का एक भी सदस्य जिला पंचायत नहीं पहुंचा। आखिरकार कोरम के अभाव में भाजपा का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। अब आगामी एक साल तक अपराजिता सोनकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
भाजपा के सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, पिंडरा विधायक अवधेश सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, महासचिव प्रभात सिंह समेत भाजपा नेताओं ने बीते 21 जून को डीएम योगेश्वर राम मिश्रा से मिलकर उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का पत्र सौंपा था।
48 सदस्यों वाले सदन में भाजपा ने 32 पंचायत सदस्यों के समर्थन का दावा किया था। डीएम ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग के लिए पहले 15 जुलाई और बाद में 28 जुलाई की तिथि तय की थी। शुक्रवार को दिन में 11 बजे से बैठक शुरू होनी थी और 11:30 तक सभी सदस्यों को पंचायत भवन के सभागार में पहुंचना था।
जिला जज ने बैठक की अध्यक्षता के लिए स्पेशल सीजेएम उमानाथ जिंदल को अधिकृत किया था। तय समय पर डीएम और स्पेशल सीजेएम बैठक में पहुंच गए थे। सुरक्षा के लिहाज से कचहरी परिसर के बाहर से लेकर पंचायत भवन तक फोर्स की तैनाती भी की गई थी।
जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव, महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, पूर्व मंत्री मनोज राय धूपचंडी, कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ विश्वकर्मा भी मौके पर थे।
हालांकि सपा के जिला पंचायत सदस्यों को किसी बाहरी स्थान पर रखा गया था। भाजपा के सदस्यों का इंतजार होता रहा लेकिन 11:30 बजे तक कोई नहीं पहुंचा। इंतजार के बाद दोपहर करीब 12 बजे स्पेशल सीजेएम और डीएम उठकर चले गए।
भाजपा सदस्यों के न पहुंचने से अपराजिता की कुर्सी बरकरार रही और सपाइयों ने अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए।