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भाजपा के गढ़ में सपा का परचम बरकरार, अध्यक्ष बनी रहेंगी अपराजिता

Sat, 29 Jul 2017 12:55 PM IST
amarujala.com, written by अजीत कुमार सिंह
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जीत के बाद अपराजिता सोनकर - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी जिला पंचायत में समाजवादी पार्टी की अपराजिता सोनकर की कुर्सी बरकरार रहेगी। भाजपा की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कोरम के अभाव में  गिर गया।
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दरअसल दिन में 11 से 11:30 बजे तक सभी सदस्यों को जिला पंचायत सभागार में बैठक के लिए पहुंचना था। यह समय जिला प्रशासन की ओर से तय किया गया था। सपा नेता पहुंचे लेकिन वे जिला पंचायत भवन के बाहर ही रहे।

उनका कहना था कि चूूंकि अविश्वास प्रस्ताव भाजपा ने रखा है, ऐसे में वही दावा पेश करे। समय बीत गया लेकिन भाजपा का एक भी सदस्य जिला पंचायत नहीं पहुंचा। आखिरकार कोरम के अभाव में भाजपा का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। अब आगामी एक साल तक अपराजिता सोनकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
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भाजपा के सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, पिंडरा विधायक अवधेश सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, महासचिव प्रभात सिंह समेत भाजपा नेताओं ने बीते 21 जून को डीएम योगेश्वर राम मिश्रा से मिलकर उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का पत्र सौंपा था।

48 सदस्यों वाले सदन में भाजपा ने 32 पंचायत सदस्यों के समर्थन का दावा किया था। डीएम ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग के लिए पहले 15 जुलाई और बाद में 28 जुलाई की तिथि तय की थी। शुक्रवार को दिन में 11 बजे से बैठक शुरू होनी थी और 11:30 तक सभी सदस्यों को पंचायत भवन के सभागार में पहुंचना था।

जिला जज ने बैठक की अध्यक्षता के लिए स्पेशल सीजेएम उमानाथ जिंदल को अधिकृत किया था। तय समय पर डीएम और स्पेशल सीजेएम बैठक में पहुंच गए थे। सुरक्षा के लिहाज से कचहरी परिसर के बाहर से लेकर पंचायत भवन तक फोर्स की तैनाती भी की गई थी।

जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव, महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, पूर्व मंत्री मनोज राय धूपचंडी, कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ विश्वकर्मा भी मौके पर थे।

हालांकि सपा के जिला पंचायत सदस्यों को किसी बाहरी स्थान पर रखा गया था। भाजपा के सदस्यों का इंतजार होता रहा लेकिन 11:30 बजे तक कोई नहीं पहुंचा। इंतजार के बाद दोपहर करीब 12 बजे स्पेशल सीजेएम और डीएम उठकर चले गए।

भाजपा सदस्यों के न पहुंचने से अपराजिता की कुर्सी बरकरार रही और सपाइयों ने अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए।

लखनऊ में भाजपा जिम्मेदारों की पेशी आज 

भाजपा का लोगो
अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े भाजपा नेताओं की विफलता की कहानी पार्टी हाईकमान और पीएमओ तक पहुंच गई है। सूत्रों की मानें तो इन सभी लोगों की शनिवार को लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने पेशी होनी तय है।

वैसे, इस घटनाक्रम से पार्टी का एक खेमा खुश है। उसका मानना है कि इधर-उधर रह कर पार्टी मेें आए और सिक्का चलाने की कोशिश करने वाले नेताओं की पोल खुल गई है। अविश्वास प्रस्ताव कुछ समय बाद तैयारी कर लाना चाहिए था।

इनका कहना है कि जब जिला पंचायत सदस्य शहर छोड़कर जा रहे थे, तभी पार्टी को इससे किनारा कर लेना चाहिए था। केंद्र, राज्य, निकाय में मजबूत स्थिति होने के बाद कुछ लोगों के निजी स्वार्थ के कारण जनता के बीच गलत संदेश गया है।

ये थे भाजपा के पैरोकार
जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, विधायक सुशील सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुजीत सिंह, प्रभात सिंह और अमित सोनकर।
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कपसेठी हाउस से भाजपा ने बनाई दूरी

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अपराजिता की जीत में कपसेठी हाउस का फैक्टर ने पूरा असर दिखाया। सैयदराजा से भाजपा विधायक सुशील सिंह और उनके भाई पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुजीत सिंह उर्फ डॉक्टर के नेतृत्व में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था लेकिन अंत में भाजपा ने इससे दूरी बना ली। 

राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी और अनिल राजभर ने इस मामले में दिलचस्पी नहीं दिखाई। तिवारी ने तो साफ कहा-इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें फिरोजाबाद का प्रभारी बनाया गया था। वहां के जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया और भाजपा की जीत हुई।
 
 यही वजह रही कि भाजपा के सभी बड़े नेताओं ने इससे दूरी बना ली। पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी निष्पक्ष रहे। यही नहीं, किसी बड़े मंत्री ने आला अधिकारियों से जिला पंचायत चुनाव के बाबत कोई बात नहीं की।

अविश्वास प्रस्ताव पास होने पर अमित सोनकर को अध्यक्ष बनाने की तैयारी थी। सूत्रों की मानें तो अमित ने सपा समर्थित आधा दर्जन सदस्यों को अपने पक्ष में करने की कोशिश के साथ-साथ भाजपा समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने के लिए तन-मन-धन का इस्तेमाल किया था।
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