सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य किरणमय नंदा ने 1992 में उस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी, जिसमें मुलायम सिंह यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। 2017 में नंदा की अध्यक्षता में ही हुए अधिवेशन में अखिलेश यादव को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।
सपा के थिक टैंक माने जाने वाले नंदा विधानसभा चुनाव के सातवें चरण के मतदान से पूर्व वाराणसी में हैं। पूर्वांचल पर उनका खास फोकस है। कहते हैं पूर्वांचल समाजवादियों का गढ़ है। हम पूर्वांचल फिर जीतेंगे। सरकार भी बनाएंगे।
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के विवाद में आपका नाम लिया जाता है। कितनी सच्चाई है?
- सपा सरकार बनने के दो साल बाद ही पार्टी में अखिलेश यादव को बागडोर सौंपने की मांग उठने लगी थी। अखिलेश का परिवार भी यही चाहता था। पार्टी में पहले तय हुआ था कि अखिलेश चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे।
अमर सिंह के आने के बाद से गड़बड़ होने लगा। इसी दौरान ही मैंने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि चुनाव में अखिलेश ही चेहरा होंगे। मुलायम सिंह से भी कई बार बातचीत हुई थी। अंत में मैंने वही किया जो पार्टी के हित में था। अधिवेशन में अखिलेश को अध्यक्ष चुना गया। सपा अब पहले से ज्यादार मजबूत है।
अमर सिंह को लेकर पार्टी में विवाद का पूरा मामला क्या था?
- दरअसल, अमर सिंह को भाजपा ने साजिश के तहत सपा में भेजा था। अमर सिंह अखिलेश यादव को कमजोर करना चाहते थे। धीरे-धीरे यह बात सबको पता चल गई। उनके आने के बाद से ही पार्टी और परिवार में विवाद शुरू हुआ।
अमर सिंह जब-जब पार्टी में आए, विवाद हुआ। 1997 में जब वह सपा में आए तो मैंने विरोध किया। नेताजी ने नहीं सुनी तो मैं पार्टी छोड़कर चला गया। 2010 में अमर सिंह पार्टी से निकाले गए तो मैं पार्टी में वापस आया।