11 सितंबर यानी कल से सोरहिया मेला, पूजी जाएंगी मां लक्ष्मी शुरू होगा। 16 दिनों तक मां लक्ष्मी की विशेष पूजा होगी। भव्य मेला सजेगा। श्रद्धालु मां लक्ष्मी को अर्पित 16 गांठ का धागा करेंगी।
काशी के लक्खा मेले में शुमार सोरहिया मेले की शुरुआत 11 सितंबर से हो रही है। 16 दिनों तक भगवती मां लक्ष्मीजी की पूजा-अर्चना की जाएगी। धन-संपत्ति, वैभव, ऐश्वर्य के साथ ही संतान सुख की कामना से श्रद्धालु महालक्ष्मी का पूजन करेंगे। 25 सितंबर तक सोरहिया मेला लक्ष्मी कुंड पर सजेगा।
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काशी के पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि मंगलवा रात 11:13 बजे लगेगी और 11 सितंबर की रात 11:47 बजे समाप्त होगी। ज्येष्ठा नक्षत्र मंगलवार की रात 8:04 बजे से 11 सितंबर को रात 9:22 बजे तक रहेगा।
11 सितंबर को उदया तिथि में अष्टमी का मान होने के कारण भगवती लक्ष्मी की उपासना का पर्व इस दिन से आरंभ हो जाएगा। लक्ष्मीकुंड पर लगने वाले सोरहिया मेले के पहले दिन श्रद्धालु माता लक्ष्मी के मुखौटे वाली प्रतिमा को पूजन के लिए घर लेकर जाते हैं।
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माता पार्वती ने महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए काशी में यह पूजन किया था और उन्होंने 16 कलश स्थापित करके पूजन किया। मान्यता है कि जो भी 16 दिनों का व्रत अनुष्ठान करेगा, उसको धन-धान्य, सौभाग्य और संतान की प्राप्ति होगी। महिलाएं मां लक्ष्मी को 16 गांठ का धागा अर्पित करके 16 दिन के अनुष्ठान का संकल्प लेती हैं। लक्ष्मीकुंड स्थित लक्ष्मी मंदिर में माता लक्ष्मी के दर्शन के लिए 16 दिनों तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी।