जैकलिन और श्यामल ने बताया कि होली में पानी का बिल्कुल प्रयोग नहीं होता। अबीर गुलाल की जगह प्राकृतिक फूलों का प्रयोग होता है। उसने यह भी बताया कि पांडवों की वीरगाथा से प्रेरित होकर कुंवारे लड़के किशोरियों के हाथ पकड़ते हैं, जो किशोर किशोरी के कंकर का बचाव करते हुए उसका हाथ पकड़ लेता है और किशोरी के लाख प्रयास करने के बाद भी हाथ नहीं छोड़ता। समुदाय के लोग उससे उसकी शादी करने की मुहर लगा देते हैं।
मिर्जापुर में इस समुदाय के लोग कम हैं। जो भी परिवार हैं वे छत्तीसगढ़ या मध्य प्रदेश चले जाते हैं। अपनी लड़कियों को साथ लेकर और वहीं पर जाकर के विधिवत इस त्योहार को मनाते हैं और शादियों को पक्की करते हैं।
जड़ी बूटी व तंत्र-मंत्र से करते हैं उपचार
जंगलों में रहने वाले आदिवासी भील समुदाय के लोग अत्याधिक धार्मिक प्रवृति के होते हैं। देवी-देवताओं पर इनका अधिक विश्वास होता है। यह अपनी किसी भी बीमारी का इलाज जंगली जड़ी बूटियों एवं देवी उपासना से करते हैं। अत्यधिक बुखार आने पर अपने शरीर को गर्म लोहे से दागते है। विज्ञान के युग में आज भी यह अपने पुरानी परंपरा पर कायम है, पर अब कहीं कहीं ऐसा होता है।