उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्वर्गीय पंडित कमलापति त्रिपाठी के मंझले पुत्र पंडित मायापति त्रिपाठी का सोमवार की रात निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। पिछले कुछ समय से काफी अस्वस्थ चल रहे थे। औरंगाबाद हाउस स्थित आवास में सोमवार रात करीब पौने 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
निधन की खबर फैलते ही कांग्रेस नेताओं और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ पड़ी। पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए औरंगाबाद हाउस पर लोगों का तांता लग गया। पंडित मायापति अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी सहित भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। मंगलवार की सुबह औरंगाबाद हाउस से मणिकर्णिका घाट के लिए निकली शवयात्रा में कांग्रेस नेताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों की भीड़ उमड़ पड़ी।
मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि बड़े बेटे अंबरीष पति त्रिपाठी ने दी। पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी के तीन पुत्रों में सबसे बड़े पंडित लोकपति त्रिपाठी का वर्ष 2005 देहावसान हो चुका है। पंडित मायापति त्रिपाठी दूसरे नंबर पर थे। सबसे छोटे पुत्र पंडित मंगलापति त्रिपाठी हैं।
पंडित मायापति ने बीएचयू और फिर लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की थी। 1972 में अखिल भारतीय किसान मजदूर वाहिनी की स्थापना की और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 1974 में गोरखपुर से एमएलसी और 1984 में लखनऊ से लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन जीत हासिल नहीं हुई।
इस वाहिनी की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय योगदान के लिए हर वर्ष पंडित कमला पति त्रिपाठी उत्कृष्ट सेवा सम्मान और रत्न श्री सम्मान दिया जाता है।
पंडित मायापति त्रिपाठी के निधन पर कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि पंडित मायापति के निधन से कांग्रेस की अपूरणीय क्षति हुई है। प्रो. सतीश राय ने कहा कि पंडित मायापति राजनीतिक सूझबूझ के धनी थे।
उनसे गूढ़ विषयों पर भी सार्थक मार्गदर्शन मिलता था। पंडित मायापति के भतीजे पूर्व एमएलसी राजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि चाचाजी के निधन से परिवार से शीर्ष संरक्षक का साया उठ गया। वह पार्टी और परिवार के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।