उन्होंने बताया कि शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलती है। मलमास में सोमवती अमावस्या का यह महासंयोग तीन दशक बाद आया है। इससे पहले ऐसा संयोग आषाढ़ मास के अधिकमास में 15 जुलाई 1996 को पड़ा था। पूजन के लिए अमृतकाल मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से 7:55 बजे तक तथा सुबह 9 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा।
बड़ी शीतला मंदिर के महंत शिव प्रसाद पांडेय ‘’लिंगिया’’ ने बताया कि पुरुषोत्तमी अमावस्या का मलमास में पड़ना अत्यंत दुर्लभ है। काशी में इस तिथि पर कपिलधारा में पितरों का तर्पण करने से गया तीर्थ के समान फल प्राप्त होता है। सुहागिन महिलाएं पीपल और बरगद के वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी।
मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु ने बताया कि मलमास की अमावस्या पर कपिलधारा में पितरों का तर्पण करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों के कष्ट दूर कर उन्हें विभिन्न बाधाओं से मुक्ति प्रदान करते हैं।