बिजली की खराब व्यवस्था से उद्यमी नाखुश
उद्यमी अनुपम देवा ने कहा जिले को 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है। कहीं ट्रांसफॉर्मर जल रहा है तो कहीं जंफर और डीओ उड़ने से पावर कट की समस्या पिछले कुछ साल से बढ़ी है। इसका असर उत्पादन पर पड़ रहा है। ये स्थिति तब है जब हम बिजली बिल का भुगतान समय से करते हैं। द स्माॅल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने कहा कि निर्बाध और गुणवत्तायुक्त बिजली न मिलने से उत्पादन लागत भी कम होती जा रही है।
हर समय ट्रिपिंग की वजह से उत्पाद और उसकी गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है। न तो खंभों पर लटकते तारों से निजात मिल पा रही है और न ही कटौती की सूचना पर समय से उसका समाधान कराया जा रहा है। किसी एक औद्योगिक इकाई में समस्या होने पर पूरे फीडर की लाइट बंद कर दी जाती है। इस पर रोक लगनी चाहिए। इस दौरान नियामक आयोग से सचिव सुमित अग्रवाल, सदस्य संजय कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी माैजूद रहे।
जनसुनवाई में ये मुद्दे उठे
- बिजली निगम की ओर से जारी 1912 नंबर पर कोई समस्या बताने पर उसका समाधान हुए बिना ही मोबाइल पर समाधान का मेसेज आ जाता है। इसकी निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था होनी चाहिए।
- अपार्टमेंट में रहने वालों से बिल्डर पूरा बिजली का बिल लेते हैं लेकिन ट्रांसफॉर्मर में खराबी पर उसको बनाया नहीं जाता है। इस पर नए सिरे से नियम बनाना चाहिए ताकि अपार्टमेंट में रहने वालों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती रहे।
- जिन लोगों ने कनेक्शन काटने के लिए आवेदन किया है, उनके कनेक्शन नहीं काटे गए हैं। इससे न केवल बिजली का बिल बकाया दिख रहा है, बल्कि उसमें एरियर जोड़कर बिजली का बिल निगम दे रहा है।
- समस्याओं के समाधान के लिए ग्रीवांस सेल बनाने की बात तो होती है लेकिन इसकी बैठक नहीं होती। ऐसे में समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखने का मौका नहीं मिलता है।
- उपकेंद्रों, बिजली कार्यालयों पर समस्या लेकर जाने के बाद भी कर्मचारी जल्द नहीं सुनते हैं।
- स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव तो अधिकारियों की ओर से दिया जा रहा है लेकिन गड़बड़ी को सुधरवाने के लिए उपकेंद्रों का चक्कर लगाना पड़ता है।
बिजली दरों पर चर्चा के लिए निगमों में चल रही जनसुनवाई : अध्यक्ष
यूपी विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार भी एक के बाद एक समस्याएं सुनकर बहुत चिंतित दिखे। सभी की बातों को सुनने के बाद कहा कि स्मार्ट मीटर, बिजली कटौती, औद्योगिक इकाइयों में निर्बाध आपूर्ति न मिलने सहित जो भी समस्याएं हैं, उसका समाधान अधिकारियों को कराना चाहिए।
कहा कि आयोग की ओर से बिजली की दरों पर चर्चा के लिए ही अलग-अलग निगमों में जनसुनवाई की जा रही है। इसमें निगमों को मिलने वाले बजट, उनकी आय, उसके सापेक्ष खर्च, उपभोक्ताओं को दी जाने वाली राहत सहित अन्य बिंदुओं पर मंथन किया जा रहा है। अध्यक्ष ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को भी सरकार की ओर से दी जाने वाली बिजली निगम की योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। प्राय: यह सुनने को मिल रहा है कि पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जितने की बिजली, उससे कम वसूली, बड़ी चिंताजनक
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम उपभोक्ताओं को जितनी बिजली दे रहा है, उस हिसाब से बिल का कलेक्शन नहीं कर पा रहा है। यह भी चिंताजनक है। एक उदाहरण के तौर पर बताया कि 100 यूनिट के सापेक्ष 83 यूनिट का ही बिजली बिल जेनरेट हो पा रहा है। यानी 17 प्रतिशत बिजली चोरी हो रही है।
इस तरह के लॉस को रोकना होगा। निगम के तहत करीब 19 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्होंने कभी बिल ही नहीं जमा किया है। इस पर भी अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है। उपभोक्ताओं की शिकायत के निस्तारण का समय निर्धारित है, अगर समय से इसका समाधान नहीं होता है तो आयोग को ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से इसकी शिकायत की जा सकती है।
इससे पहले एमडी शंभू कुमार ने बताया कि निगम के तहत आने वाले 30 जिलों में सत्र 2025-26 में 1,12,67,176 उपभोक्ताओं के लिए 1,89,76,506 मेगावाट बिजली खपत हो रही है। बिजली बिल राहत योजना में सबसे अधिक 15.68 लाख उपभोक्ताओं ने एक साथ बकाया बिल जमा किया।