तीन चरणों में खुला फर्जीवाड़े का जाल
पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण की देखरेख में पुलिस ने कुल 43 व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंसों और 80 से अधिक शस्त्रों का भौतिक सत्यापन कराया। यह जांच तीन भागों में पूरी की गई। पहले भाग में मुख्तार अंसारी और उसके 5 परिजनों के शस्त्रों की वर्तमान स्थिति, दूसरे भाग में गैंग (आईएस-191) के 11 सदस्यों और सहयोगियों के शस्त्रों की जांच तथा तीसरे भाग में शस्त्र लिपिकों और अधिकारियों द्वारा बिना तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के 27 व्यक्तियों को फर्जी ढंग से जारी किए गए शस्त्र लाइसेंस की जांच की गई।
पत्रावलियां गायब कर दी गई सहूलियत
जांच में यह तथ्य सामने आया कि लाइसेंसों की मूल पत्रावलियां और हथियारों के क्रय-विक्रय से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, गाजीपुर से ही गायब करा दिए गए थे। यह सब लाइसेंसधारकों और तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की मिलीभगत से आपराधिक षड्यंत्र के तहत किया गया, ताकि हथियारों का वास्तविक इस्तेमाल और उनका दुरुपयोग छिपाया जा सके।
इन पर दर्ज हुई हैं प्राथमिकी
- अफजाल अंसारी (सांसद) – तीन प्राथमिकी में नामजद असफाक अहमद – तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रथम
- गौरीशंकर राम – तत्कालीन शस्त्र लिपिक द्वितीय अफसा बेगम – मुख्तार अंसारी की पत्नी (फरार) बृजनारायण राम – तत्कालीन पटल सहायक
- भीष्म सिंह यादव – तत्कालीन पटल सहायक
- प्रेमशंकर वर्मा – तत्कालीन शस्त्र लिपिक
- गौरीशंकर लाल – तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रथम
- सुग्रीव तिवारी – तत्कालीन शस्त्र लिपिक द्वितीय
- मो. शाहिद – मुख्तार अंसारी का सहयोगी
- तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक, मुहम्मदाबाद तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल
पूरे प्रकरण की गहराई से जांच के लिए एक सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी तंत्र का ही दुरुपयोग करके अवैध असलहे हासिल किया था। इस प्रकरण में आगे भी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-वैभव कृष्ण, डीआईजी वाराणसी परिक्षेत्र