प्रारंभिक जांच में खुली पुलिस की पोल
डीआईजी वाराणसी ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) डॉ.राकेश कुमार मिश्रा से प्रारंभिक जांच कराई। जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अपनी जांच रिपोर्ट में एएसपी सिटी ने उल्लेख किया कि 08 दिसंबर 2023 की घटना के वीडियो साक्ष्य से स्पष्ट था कि दोनों पक्ष दोषी थे, लेकिन तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने विपक्षी शंकर पाण्डेय की तहरीर पर एनसीआर दर्ज कर केवल शिकायतकर्ता पक्ष के खिलाफ ही कार्रवाई की।
मुख्य आरोपी शंकर पाण्डेय के खिलाफ वर्ष 2021 में ही गैंगेस्टर एक्ट और जिला स्तरीय पंजीकृत गैंग (डी-63) का मुकदमा दर्ज था। इसके बावजूद उसकी हरकतों को नजरअंदाज करते हुए गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की बजाय मात्र खानापूर्ति कर इतिश्री कर ली गई। इतना ही नहीं शंकर पाण्डेय और उसके गैंग के खिलाफ प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई न होने के कारण लगातार घटनाएं होती रहीं।
यहां तक कि 14 दिसंबर 2023 की घटना के दौरान मौके पर पहुंचने के बावजूद तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया गया। साथ ही शिकायतकर्ता द्वारा फरवरी और दिसंबर 2023 में दिए गए शिकायती पत्रों की जांच हल्का प्रभारी को सौंपी गई थी, जिन्होंने बिना किसी गहन पड़ताल के दोनों पत्रों पर घिसी-पिट्टी और समान आख्या लगाकर महीनों बाद जुलाई 2024 में एक साथ प्रेषित की।
अधिकारी बोले
वाराणसी परिक्षेत्र के जनपदों गाजीपुर, जौनपुर और चंदौली में आम जनता व व्यापारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा तथा कर्तव्यों के प्रति किसी भी स्तर पर शिथिलता बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। परिक्षेत्र स्तर पर ऐसे मामलों की सतत निगरानी की जा रही है।
-वैभव कृष्ण, डीआईजी, वाराणसी परिक्षेत्र