फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालयः फर्जीवाड़े की जांच को पहुंची एसआईटी, 10 साल के प्रमाणपत्र खंगाले

Fri, 22 Jun 2018 05:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
विज्ञापन
 संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्र पर नौकरी करने वाले दर्जनों शिक्षकों की नौकरी पर खतरे की तलवार लटकनी शुरू हो गई है। इस मामले में अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
विज्ञापन


एसआईटी की तीन सदस्यीय टीम द्वारा दूसरे दिन संदिग्ध प्रमाणपत्रों की जांच और संबंधित लोगों के बयान लिए गए। आशंका जताई जा रही है कि पिछले दस सालों के प्रमाणपत्र फर्जी मिले तो सभी शिक्षकों पर कार्रवाई तय है। इसमें 75 जिलों में तैनात शिक्षक शामिल हैं और अभी तक 18 जिलों के सत्यापन पूर्ण हो चुके हैं।

संस्कृत विश्वविद्यालय में दूसरे दिन अफरातफरी का माहौल रहा। गुरुवार को एसआईटी की टीम ने दूसरे दिन भी अधिकारियों और कर्मचारियों का बयान लिया। संदिग्ध डिग्रियों की जांच के लिए पहुंची एसआईटी की टीम ने परीक्षा और गोपनीय विभाग के पिछले दस सालों के प्रमाण पत्रों व कागजातों का सत्यापन भी शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


फर्जीवाड़े के मामले में एसआईटी 2004 से 2014 तक जारी प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय पहुंची है।  एसआईटी का कहना है कि प्रदेश के 75 जिलों में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जारी डिग्री के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक के पद पर नौकरी कर रहे हैं।

 इसमें संदिग्ध डिग्रियों की संख्या लगभग पांच हजार के आसपास है। अगर ये फर्जी प्रमाणित हो जाते हैं तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। इसलिए इन प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है। सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई।
उनसे प्राप्त अभिलेखों का परीक्षण किया गया है। अब विश्वविद्यालय से दोबारा प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जा रहा है।
Trending Videos
विज्ञापन

अधिकारी और कर्मचारियों पर भी गिर सकती है गाज

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
संस्कृत विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है। 2004 से 2014 तक तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है और उनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है।

प्रमाणपत्र फर्जी होने के साथ-साथ यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसके पीछे किसका हाथ है? इसमें विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के अलावा और कौन शामिल हैं।

पूर्व कुलपति के कार्यकाल में भी आई थी एसआईटी
एसआईटी की टीम पूर्व कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे के कार्यकाल में भी आई थी। मगर टीम को अभी तक पर्याप्त जानकारीं नहीं मिल सकी थी। उन्होंने कई अभिलेखों के लिए विश्वविद्यालय को पत्र लिखा, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह भी पूछा गया था कि 2004 से 2014 तक परीक्षा विभाग में कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी तैनात थे। उनका मोबाइल नंबर भी मांगा गया था।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजनाथ ने कहा कि  एसआईटी का सत्यापन पूर्ण होने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है। पूरे मामले की जांच चल रही है और विश्वविद्यालय की ओर से इसमें पूरा सहयोग किया जा रहा है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें