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गायन, वादन और नाट्य का हुआ गंगा तट पर संगम

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नवसंवत्सर के स्वागत में उत्तरवाहिनी के तट पर रात भर सांस्कृतिक अनुष्ठान होता रहा। काशी के उदीयमान कलाकारों व ख्यात कलासाधकों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। एक तरफ जहां मंच से संगीत मुखर हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ चित्रकारों की टोली 15 फीट लंबे और ढाई मीटर चौड़े विशाल कैनवास पर कलाकृतियां उकेर रही थी।
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संस्कार भारती की ओर से देर रात हुए सांस्कृतिक अनुष्ठान की शुरुआत संत अतुलानंद स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा दुर्गे दुर्गति नाशिनी पर समूह नृत्य से हुई। सौरव-गौरव मिश्र ने भगवान शिव को समर्पित कथक नृत्य की भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को आनंदित किया। बीएचयू के डॉ. एके चंचल ने राग चारुकेशी में बड़ा और छोटा ख्याल के बाद भजन सुनाया। गायिका विदुषी सुचरिता गुप्ता ने उपशास्त्रीय गायन की विविध विधाओं से दर्शकों को रूबरू कराया। इसके बाद डॉ. शनीश का एकल बांसुरी वादन और पं. ललित कुमार का एकल तबला वादन कर्णप्रिय रहा।
अनुष्ठान में नाटकों का भी समावेश हुआ। पहले उमेश भाटिया और उनकी टीम ने क्रांतिकारी शचींद्रनाथ सान्याल के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया। इसके बाद डॉ. अष्टभुजा मिश्र के निर्देशन में नौटंकी शैली में गदर ए बनारस का मंचन हुआ। आवर्तन संस्था की प्रशिक्षु कलाकार नवी शर्मा, नायशा शर्मा, तितली, शरण्या शर्मा और अंशिका ने एकल व समूह गायन किया। डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने भी शिव भजन की सुमधुर प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीता। इसके पूर्व संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. राजेश्वर आचार्य, राज्य मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, संस्कार भारती दीपक शर्मा व बांकेलाल, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव और वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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