इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार के ओडीओपी मॉडल को भी अपनाया जाएगा और दोनों का एमओयू साइन होगा। उत्तर प्रदेश की ओर प्रतिनिधि का नाम अभी तय नहीं हुआ है। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी, जहां क्राउड फ्लो डिजाइन, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणालियों को समझा जाएगा। टूरिज्म राउंड टेबल में काशी-उज्जैन-चित्रकूट धार्मिक पर्यटन सर्किट को संयुक्त पर्यटन उत्पाद के रूप में विकसित करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
सहयोग सम्मेलन में एमपी सीएम डॉ. मोहन यादव बनारसी कारीगरों से मुलाकात करेंगे और उनके काम के तरीके जानेंगे, जिसे मध्य प्रदेश में भी लागू किया जाएगा। पर्यटन विभाग काशी में किस तरह काम कर रहा है, उसका प्रस्तुतिकरण देखेंगे और एमपी के संबंधित अफसरों की टीम उसे समझकर मध्य प्रदेश में लागू करेगी।
सम्मेलन में ओडीओपी, जीआई टैग उत्पादों, पारंपरिक शिल्प, कृषि एवं फूड उत्पादों को ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात से जोड़ने पर विशेष फोकस रहेगा। उत्तर प्रदेश की ओडीओपी पहल और उसके आर्थिक प्रभावों की प्रस्तुति से यह स्पष्ट होगा कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जा सकता है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच एमओयू: सम्मेलन में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके माध्यम से व्यापारिक सहयोग, औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प संवर्धन और पर्यटन क्षेत्र में साझेदारी को औपचारिक रूप दिया जाएगा। यह समझौता केवल दस्तावेजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा।