सिकरौरा नरसंहार कांड मामले में मंगलवार को वाराणसी कोर्ट में सुनवाई हुई। वादिनी हीरावती अपने विधिक पैरोकार के साथ कोर्ट में पेश हुईं।
सिकरौरा नरसंहार कांड में गवाही के लिए समय मांगे जाने पर आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह पर ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामले की सुनवाई की अगली तिथि 16 दिसंबर नियत की गई है। कोर्ट में मंगलवार को बृजेश सिंह नहीं पेश हुए।
सेंट्रल कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक की ओर से रिपोर्ट पेश की गई कि एमएलसी अस्वस्थ हैं। वहीं, वादिनी हीरावती अपने विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक और अधिवक्ताओं के साथ 43 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के बीच पेश हुईं। कोर्ट में बृजेश सिंह की तरफ से एक आवेदन दाखिल किया गया। कहा गया कि नौ अप्रैल, 1986 को हुए हत्याकांड के सभी आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पूर्व में दोषमुक्त कर दिया था।
आरोपी के खिलाफ भी वही साक्ष्य रहे बल्कि उससे कमतर साक्ष्य हैं। ऐसे में यदि एक ही अपराध में पहली बार हुए ट्रायल में आरोपी दोषमुक्त है तब बाद में उसी अपराध से संबंधित मुकदमे को समाप्त कर आरोपी को बरी कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि जब अन्य आरोपियों का ट्रायल चल रहा था तब आरोपी फरार था। ऐसे में न्यायालय मुकदमे को समाप्त कर आरोपी को बरी नहीं कर सकता।
इस आवेदन के खारिज होने के बाद आरोपी पक्ष ने गवाही के लिए दूसरी तारीख दिए जाने का अनुरोध किया। इस पर डीजीसी फौजदारी ने आपत्ति जताई कि वादिनी को कड़ी सुरक्षा में लाने पर काफी धन खर्च हो रहा है और फोर्स लगानी पड़ रही है। इसका हरजाना आरोपी से वसूला जाना चाहिए। कोर्ट ने 2500 रुपया जुर्माना भरने का आदेश देते हुए गवाही के लिए 16 दिसंबर की तिथि नियत की।
कोर्ट ने कहा कि यह पुराना मुकदमा है जिसे हाईकोर्ट इलाहाबाद के एक्शन प्लान के तहत 31 मार्च, 2018 तक निस्तारित करना है। चंदौली एसपी को वादिनी को पेशी के लिए निर्देशित करने के साथ ही दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को बयान दिलाने में अगली तारीख पर सहयोग करने की बात भी आदेश में कही गई।