सुनवाई योग्य न होने के चलते परिवाद खारिज।
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कोरोना महामारी की वैक्सीन कोवीशील्ड से साइड इफेक्ट होने का दावा कर दाखिल किए गए परिवाद को सुनवाई योग्य न होने के चलते खारिज कर दिया गया। सिविल जज सीनियर डिवीजन द्रुतगामी / एमपी-एमएलए कोर्ट प्रशांत कुमार सिंह-II की अदालत में दाखिल इस परिवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीरम इंस्टीट्यूट कंपनी, उसके चेयरमैन व सीईओ, एस्ट्रोजेनिक कंपनी व उसके चेयरमैन समेत 28 लोगों को विपक्षी बनाया गया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रधानमंत्री का पद एक लोकसेवक का पद है। इस पद पर आसीन नरेंद्र मोदी ने अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में कोविड महामारी से लड़ने के लिए कई फैसले लिए थे। इसलिए उनके विरुद्ध कोई भी विधिक कार्यवाही करने से पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-197 के तहत अभियोजन स्वीकृति अनिवार्य है।
परिवादी द्वारा ऐसी कोई अभियोजन स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई है। ऐसे में परिवादी का वाद पोषणीय नहीं है और खारिज किए जाने योग्य है। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष व अधिवक्ता विकास सिंह ने अपने अधिवक्ता गोपाल कृष्ण के माध्यम से कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था।
उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीरम इंस्टीट्यूट कंपनी, उसके चेयरमैन व सीईओ, एस्ट्रोजेनिक कंपनी व उसके चेयरमैन समेत सभी 28 विपक्षियों ने आपस में मिलीभगत की। बगैर किसी परीक्षण के कोवीशील्ड दवा बनाकर लोगों को भय दिखाकर कोरोना वैक्सीन बताकर लोगों को जबरन लगवाए और उससे लाभ अर्जित किए।
वैक्सीन बनाने वाली कंपनी द्वारा प्रधानमंत्री को उस लाभ में हिस्सेदार बनाते हुए उन्हें चंदा के रूप में कंपनी द्वारा अर्जित लाभांश दिया गया। याचिका में यह भी आरोप था कि विपक्षीगणों द्वारा यह जानते हुए कि दवा का साइड इफेक्ट होगा, लोगों को जानबूझकर मौत के मुंह में धकेला गया।
वहीं इस संबंध में युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि न्यायालय का आदेश सर्वमान्य है। न्यायालय के निर्णय पर कोई टिपण्णी किये बगैर उन्होंने कहा कि कानून के खिलाफ कार्य करने वालों के खिलाफ उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।