वाराणसी। श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति की ओर से सोमवार को महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में सप्ताहव्यापी श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा मर्मज्ञ बालव्यास पं. श्रीकांत शर्मा ने काशी में 37वीं बार कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि काशी में विश्वनाथ ही गुरु हैं। यहां जिसने गंगाजल ग्रहण कर लिया, उसे कोई पराजित नहीं कर सकता। भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में निवास करते हैं, जबकि महादेव आनंदवन में रमण करते हैं। महादेव की महिमा का बखान करते हुए बालव्यास ने कहा कि उनका नाम शिव इसलिए पड़ा, क्योंकि वे मनुष्यों का कल्याण करने वाले हैं। जो सबका कल्याण करें, वही शिव हैं। जो अव्यक्त, अनंत और अद्वितीय हैं, वही शिव हैं। महादेव का एक स्वरूप अमरनाथ जी भी हैं, जो यह शिक्षा देते हैं कि जो आया है, उसे जाना ही है।
उन्होंने भागवत कथा महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि यह कथा वीतरागियों और भगवान के प्रेमियों की है। स्वामी करपात्री जी महाराज जैसे संत छह माह तक भागवत कथा का श्रवण कराते थे। बालव्यास ने कहा कि भागवत आनंद प्रदान करने वाली कथा है। ईश्वर के तीन स्वरूप हैं—सत्, चित् और आनंद। यह आनंद भोजन, प्रसाद और भौतिक संसाधनों में नहीं है, बल्कि असली आनंद भगवान के चिंतन, मनन और भजन में है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध को फेंटने से घी तैयार होता है, उसी प्रकार भजन करने से जीवन में असली आनंद उत्पन्न होता है। संचालन कृष्ण कुमार काबरा ने किया।
शृंगेरी मठ से निकली पोथी यात्रा
कथा के शुभारंभ पर पहले दिन महमूरगंज स्थित शृंगेरी मठ से विशाल पोथी यात्रा निकाली गई। कथा यजमान ओम प्रकाश तुलस्यान, संचित तुलस्यान, बैजनाथ भालोटिया, शुभम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल, किशन भालोटिया, उर्मिला सिंह, भरत संथोलिया आदि भक्त सिर पर श्रीमद्भागवत की पवित्र पोथी लेकर चल रहे थे। उनके पीछे बैंड-बाजे की धुन पर भक्ति में लीन होकर कथा प्रेमी चलते रहे। यात्रा महमूरगंज तिराहा होते हुए कथा स्थल पहुंचकर समाप्त हुई। शोभायात्रा में अवधेश खेमका, महेश चौधरी, सुरेश तुलस्यान, अशोक सराफ, गोपाल अग्रवाल, आनंद स्वरूप अग्रवाल, अमित अग्रवाल, राजेश गट्टानी आदि शामिल रहे।