अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में हुए छह दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा की। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के डॉ. अवनीश भटनागर ने कहा कि विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, नैतिक चेतना विकसित करने की जरूरत है। ऑनलाइन कार्यक्रम में डॉ. अवनीश ने भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं जीवन-दृष्टि को शिक्षा के साथ जोड़ने की बात कही। कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना नहीं बल्कि व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व का विकास करना भी है। अध्यक्षता करते हुए आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को समझने, संरक्षित करने के साथ ही वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सार्थक रूप से समाहित करने की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शिक्षा को अधिक समग्र, मूल्यपरक एवं जीवनोपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजा पाठक ने किया।