श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का प्रदेश सरकार ने 1983 में अधिग्रहण किया था। इसके बाद दो इकाइयों का गठन किया गया। इसमें पूजन-परंपरा की निगरानी समेत निर्णय लेने के लिए विधायी संस्था के तौर पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद बनाया गया। इसमें शृंगेरी शंकराचार्य व संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ ही वित्त, कानून एवं विधि परामर्शी, धर्मार्थ, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और सीईओ को मानद सदस्य बनाया गया। साथ ही पांच विद्वानों को बतौर सदस्य तीन-तीन वर्ष के लिए नामित करने का प्रावधान किया गया।