हरिशयनी एकादशी यानी छह जुलाई को भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे। इसके बाद चातुर्मास भर मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। साधु-संत चार माह तक प्रवास बंद कर देंगे। हरिशयनी एकादशी पर श्रीहरि विष्णु का पूजन-अर्चन कर उपवास रखने से मनोकामना पूर्ण होगी और एक हजार अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होगा। वहीं, विष्णु मंदिरों में चातुर्मास भर शृंगार व पूजन होगा।
ज्योतिषविद विनय पांडेय और आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी छह जुलाई को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चले जाएंगे। एकादशी तिथि पांच जुलाई को शाम 6:29 बजे से अगले दिन रात 8:28 बजे तक रहेगी। चातुर्मास भर भगवान सत्य नारायण की कथा होगी और विष्णु मंदिरों में पूजन-अर्चन होगा। इस एकादशी पर देवगुरु भगवान विष्णु शयन मुद्रा में चले जाएंगे तो सूर्य दक्षिणायन हो जाएंगे। इसके बाद भगवान विष्णु एक नवंबर को देवउठनी एकादशी पर जागृत होंगे और इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। हालांकि, वैवाहिक लग्न 21 नवंबर से शुरू होंगे जो 15 दिसंबर तक चलेंगे।
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इन मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक
गुरु के अस्त होने और सूर्य के दक्षिणायन होने से मांगलिक कार्यों पर रोक लगेगी। वधु प्रवेश, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा, यज्ञोपवीत और जनेऊ संस्कार आदि मांगलिक कार्यक्रमों पर विराम लग जाएंगे। हालांकि, बृहस्पति ग्रह 11 जून से ही पश्चिम दिशा में अस्त हैं। तभी से मांगलिक कार्य ठप है। वह सात जुलाई को उदय होंगे। मगर, चातुर्मास और सूर्य के दक्षिणायन होने से मांगलिक कार्य बंद रहेंगे।