डाक्यूमेंट्री ‘चिराग-ए-दैर’ की निर्माता-निर्देशक बीनू राजपूत
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बनारस शहर में जो भी आया, उसके मोहपाश में बंध गया। अलबेले शहर बनारस के मोहपाश में मिर्जा असदुल्ला खां गालिब भी बंधे। गालिब ने मसनवी ‘चिराग-ए-दैर’ बनारस पर ही लिखी है। अब जल्द ही डाक्यूमेंट्री ‘चिराग-ए-दैर’ में दुनिया गालिब की नजर से बनारस की खूबसूरती देखेगी।
कला एवं संस्कृति आधारित दर्जन भर से अधिक डाक्यूमेंट्री फिल्म बना चुकी बीनू राजपूत अपनी यूनिट के साथ इनदिनों काशी में हैं। वह बनारस को गालिब की नजर से तलाश रही हैं। फिल्मांकन के बाद यह डाक्यूमेंट्री तीन भाषाओं में हिंदी, उर्दू और फारसी में रिलीज की जाएगी।
डाक्यूमेंट्री ‘चिराग-ए-दैर’ की निर्माता-निर्देशक बीनू राजपूत ने बताया कि यह पूरी फिल्म एक घंटे की होगी। इस डाक्यूमेंट्री के जरिए बनारस को गालिब की नजर से पेश करने का प्रयास किया जाएगा।
यह एक तरह से बनारस में गालिब के बिताये दिन, लिखी नज्म और उनसे जुड़ी यादों की पुख्ता वसीयत होगी। डाक्यूमेंट्री में आवाज जम्मू एंड कश्मीर आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक अशफाक लोन की होगी।
कैमरामैन श्याम कुमार फिल्मांकन करेंगे। शूटिंग करीब दस दिन तक चलेगी। इसकी शुरुआत दशाश्वमेध से दरभंगा घाट के दृश्यों की शूटिंग के साथ हुई।
बीनू राजपूत ने बताया कि गालिब साहब बनारस को काबा-ए-हिंदोस्तां के रूप में देखते थे।