विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि स्वामी शिवानंद भारती अनवरत भगवान विश्वनाथ की उपासना, साधना कर रहे थे। उन्होंने समाज से विरक्त होकर 20 वर्ष की उम्र में संन्यास स्वीकार कर लिया था। उन्होंने पत्नी का त्याग कर दिया था। भगवान विश्वनाथ के सानिध्य में प्रात: ढाई बजे से सायंकाल छह बजे तक अनवरत गर्भगृह में बैठ कर अभिषेक करते थे। यह क्रम उनका लगभग आठ दशकों तक चला।
राजस्थान में हुआ था जन्म
स्वामी शिवानंद भारती का जन्म राजस्थान के निमेड़ा गांव में हुआ था। उनकी साधना स्थली काशी में भगवान विश्वेश्वर के सानिध्य में ललिता घाट स्थित राजराजेश्वरी मंदिर के तृतीय तल पर थी। उनके पिता जगदीश चंद्र मिश्र संस्कृत के बड़े विद्वान थे। माता का नाम बाई बच्ची देवी था। उनके छोटे भाई प्रो. सुधांशु शेखर शास्त्री बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
एक्स पर प्रधानमंत्री की पोस्ट
भगवान विश्वनाथ के परम भक्त संत शिवशंकर चैतन्य भारती जी के महाप्रयाण का दुखद समाचार काशी से प्राप्त हुआ। वह मंगला आरती में बाबा विश्वनाथ की सेवा में अनवरत उपस्थित होते थे। उनका प्रयाण काशी की संत परंपरा के लिए बड़ी क्षति है। संत भारती महाराज के शिव स्वरूप में विलीन होने पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। ऊं शांति
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी शिवशंकर चैतन्य भारती महाराज के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि चैतन्य भारती जी का जाना संत समाज और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति एवं अथाह दुःख का क्षण है। उनके ब्रह्मलीन होने से एक युग का अंत हुआ है। ॐ शांति।