भगवान शिव ने दिया था मोक्ष प्राप्ति का आशीर्वाद
काशी खंड के अनुसार महादेव ने घंटाकर्ण एवं महोदर नाम के पार्षद प्रमुखों को स्थान चयन करने के लिए काशी भेजा था। आनंद कानन वन में पहुंचने के बाद दोनों पार्षद यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर मोहित हो गए और यहीं लीन रह गए।
इसके पश्चात महादेव जब स्वयं आए तो वह आनंदकानन को देखकर मोहित हो गए। उन्होंने माता पार्वती के अनुरोध और पार्षद प्रमुखों के निवेदन करने पर उन्हें क्षमा करते हुए वरदान दिया कि घंटाकर्ण सरोवर में स्नान करके और व्यासेश्वर शिवलिंग के दर्शन करने से ही मात्र किसी व्यक्ति की मृत्यु पृथ्वी लोक में कहीं भी हो उसे काशी में ही मोक्ष जितना फल प्राप्त होगा। उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी एवं क्षेत्र संबंधी सभी पाप दूर होंगे।
गुरु पूर्णिमा के दिन दर्शन और सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व
मंदिर के प्रधान पुजारी विश्वनाथ दुबे ने बताया कि महर्षि वेदव्यास जी द्वारा स्थापित शिवलिंग का गुरु पूर्णिमा के दिन दर्शन और सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व है। व्यासेश्वर शिवलिंग के साथ ही यहां पर तुलसीदास जी द्वारा स्थापित हनुमान जी भी विराजमान हैं।
सेवक आत्माराम ने हमें बताया कि मंदिर और तालाब की सेवा करते करते हमें कई साल हो गए कुछ साल पहले तालाब की स्थिति एकदम बदतर हो गई थी। आसपास के घरों से लोग इसमें कूड़ा फेकते थे। सन 2021 में तालाब का सुंदरीकरण और जीर्णोद्धार कराया गया।