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शिक्षामित्रों का जन सत्याग्रह दूसरे दिन भी जारी, कहा-समायोजन प्रक्रिया दोषपूर्ण

Fri, 18 Aug 2017 04:12 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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मऊ में प्रदर्शन करते शिक्षामित्र - फोटो : अमर उजाला
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समायोजन बहाली की मांग को लेकर यूपी के शिक्षामित्रों का जन सत्याग्रह आज दूसरे दिन भी जारी है। स्कूलों में पठन-पाठन ठप कर शिक्षामित्र अपने-अपने जिले में बीएसए कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
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मऊ में सैकड़ों की संख्या में जुटे शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय पर जमकर नारेबाजी की। बता दें कि विद्यालयों में सत्रीय परीक्षा चल रही है। बावजूद इसके स्कूलों की परीक्षा छोड़ शिक्षामित्र धरने पर रहे। 

आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के वाराणसी के अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार दुबे का कहना है कि शिक्षामित्रों के समायोजन में अपनाई गई प्रक्रिया दोषपूर्ण है तो इसमें शिक्षामित्रों का क्या कुसूर। 17 साल से शिक्षामित्र अपनी सेवा दे रहे हैं।
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उन्होंने कहा क‌ि कोई 50 साल का हो चुका है तो कोई 55 का। उम्र के इन पड़ाव पर आकर हमारे लिए टीईटी पास करने की अनिवार्यता सही फैसला नहीं है। उन्होंने मांग की कि केंद्र व राज्य सरकार इस फैसले पर शिक्षामित्रों के हक में कदम उठाए।

शिक्षामित्रों ने अध्यादेश में संशोधन कर उन्हें पुन: सहायक शिक्षक पद पर समायोजित करने और समायोजन होने तक समान वेतन लागू करने की मांग रखी। 

90 फीसदी से अधिक शिक्षामित्रों की उम्र 40 से 45 वर्ष पार

आजमगढ़ में धरना-प्रदर्शन करते शिक्षामित्र - फोटो : अमर उजाला
वहीं भदोही के शिक्षामित्र क्रांतिमान शुक्ला ने कहा कि गत 16 साल से वह प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। 90 फीसदी से अधिक शिक्षामित्रों की उम्र 40 से 45 वर्ष पार कर चुकी है। समायोजन निरस्त होने के बाद उनके पास रोजगार का कोई विकल्प नहीं बचा है, जबकि सभी शिक्षामित्र स्नातक और बीटीसी योग्यताधारी हैं।

उन्होंने कहा कि एकाएक उनकी नौकरी खत्म होने से उनके परिवार में आर्थिक दिक्कतें बढ़ गई हैं। सभी शिक्षामित्रों ने एक स्वर से मांग की कि सरकार एक लाख 70 हजार शिक्षामित्रों को नौकरी दिलाने के लिए नया अध्यादेश लाए, अध्यादेश लाए जाने तक समायोजित शिक्षामित्रों को शिक्षकों के समान वेतन मिले और सरकार सर्वोच्च न्यायालय में पुन: विचार याचिका दाखिल किया जाए।

उधर, बृहस्पतिवार को सुबह विभाग के अपर मुख्य सचिव राजप्रताप सिंह से शिक्षा मित्रों की पुन: वार्ता हुई। सिंह ने शिक्षा मित्रों से धरना प्रदर्शन समाप्त कर स्कूलों में पढ़ाई सुचारु कराने को कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों के लिए सरकार गंभीर है, उनकी समस्या का विधिक प्रक्रिया के अनुरूप समाधान किया जाएगा।
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शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये महीने मानदेय का दिया प्रस्ताव

गाजीपुर में प्रदर्शन करते शिक्षामित्र - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने मानदेय 10 हजार रुपये से अधिक करने के संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता कराने का आश्वासन दिया। पहले दौर की वार्ता विफल रहने के बाद बृहस्पतिवार देर रात फिर शिक्षा मित्रों को वार्ता के लिए बुलाया गया।

उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि अपर मुख्य सचिव ने टीईटी से मुक्ति दिलाने के लिए एनसीटीई को पत्र लिखने का आश्वासन दिया है।

इसी प्रकार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने और सोमवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कराकर समान कार्य समान वेतन दिलाने पर विचार का आश्वासन दिया है।  संयुक्त सक्रिय शिक्षक शिक्षा मित्र संघ के संरक्षक दुष्यंत चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात और लिखित आश्वासन के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर विचार होगा।

इससे पहले शिक्षामित्रों ने दस हजार रुपये महीने मानदेय और मूल विद्यालय में पोस्टिंग के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। सरकार से वार्ता विफल होने के बाद शिक्षामित्रों ने प्रदेश के सभी जिलों में शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर स्कूलों में तालाबंदी और आंदोलन करने की घोषणा की है।

शिक्षामित्र नेताओं ने कहा कि इतने वर्ष के अनुभव के बाद भी वे 10,000 रुपये महीने में पढ़ाने को तैयार नहीं है। शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनने पर 39000 रुपये महीने वेतन व भत्ते मिल रहे हैं। 10 हजार रुपये महीने में परिवार का पालन पोषण संभव नहीं है। दोनों पक्षों के अड़ने के बाद करीब पांच मिनट में ही वार्ता विफल हो गई।
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