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Varanasi: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ दाखिल परिवाद में शशांक शेखर त्रिपाठी का बयान दर्ज, जानिए मामला?

Fri, 21 Jul 2023 12:44 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

दिग्विजय सिंह के खिलाफ दाखिल परिवाद में परिवादी शशांक शेखर त्रिपाठी का बयान स्पेशल सीजेएम/एमपीएलए उज्जवल उपाध्याय की कोर्ट में दर्ज हुआ। साथ ही कोर्ट ने गवाहों के बयान के लिए अगली तिथि नियत कर दी है। 
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कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह। - फोटो : PTI
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विस्तार
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दिग्विजय सिंह मामले में आज कोर्ट में  परिवादी का बयान दर्ज हुआ। दिग्विजय सिंह के खिलाफ दाखिल परिवाद में परिवादी शशांक शेखर त्रिपाठी का बयान स्पेशल सीजेएम/एमपीएलए उज्जवल उपाध्याय की कोर्ट में दर्ज हुआ। अदालत ने गवाहों के बयान के लिए 23 जुलाई की तिथि नियत कर दी है।  बता दें कि मामला आरएसएस के सर संघचालक के खिलाफ टिप्पणी का है।

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'संघ की सामाजिक छवि धूमिल करने का प्रयास'

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने सीजेएम/एमपी-एमएलए उज्ज्वल उपाध्याय की कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। अधिवक्ता के अनुसार आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर के खिलाफ दिग्विजय सिंह ने कूटरचित फोटो व भ्रामक तथ्यों का प्रकाशन व प्रसारण सोशल मीडिया पर किया। ऐसा करके सामाजिक विद्वेष पैदा कर संघ की सामाजिक छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।

 

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सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर - फोटो : सोशल मीडिया

गुरु गोलवलकर का पूरा जीवन सामाजिक भेदभाव समाप्त करने में लगा रहा। दिग्विजय सिंह का कृत्य समाज में विद्वेष फैलाने और सामाजिक सद्भावना बिगाड़ने के साथ ही देश की संप्रभुता, एकता व अखंडता को प्रभावित करने वाला है। इससे भाजपा, आरएसएस, भारत व यूपी सरकार अपमानित है। परिवाद में यह भी कहा गया कि माधव सदाशिवराव गोलवलकर की एक किताब का हवाला देकर दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा है कि यदि सत्ता हाथ लगे तो सबसे पहले सरकार की धन-संपत्ति, राज्यों की जमीन, और जंगल अपने दो-तीन विश्वसनीय धनी लोगों को सौंप दें।

95 फीसदी जनता को भिखारी बना दें। इसके बाद सात जन्मों तक सत्ता हाथ से नहीं जाएगी। परिवादी ने कोर्ट से आईटी एक्ट और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत विपक्षी को तलब कर विधिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। परिवादी के अनुसार, इस मामले को लेकर बीते 10 जुलाई को कैंट थाने की पुलिस को आवेदन दिया गया था। कोई कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया। 

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