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शारदीय नवरात्रि 2023: ये है कलश स्थापना की विधि, अखंड ज्योति के इन नियमों का रखें ध्यान

Sun, 15 Oct 2023 11:22 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

शक्ति की साधना के लिए नवरात्रि वाले दिन सबसे पहले तन और मन से पवित्र हो जाएं। इसके बाद जिस स्थान पर देवी की प्रतिदिन पूजा करनी हो वहां पर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर एक मिट्टी के कटोरे में कच्ची मिट्टी में जौ बो दें फिर उसके ऊपर एक तांबे या मिट्टी का कलश रखें।
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शारदीय नवरात्र : कलश स्थापना व पूजन विधि - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा से शक्ति की आराधना का महापर्व नवरात्र आरंभ हो गया है। कलश स्थापना के साथ ही घरों से लेकर मंदिरों तक सप्तशती के मंत्र गुंजायमान हुए। वाराणसी में नव दुर्गा के आराधना की तैयारियां देर रात तक चलती रहीं। अलईपुरा स्थित माता शैलपुत्री के दर्शन पूजन के लिए मध्यरात्रि से ही भक्त कतारबद्ध होने लगे थे। सुबह माता के दर्शन पाकर भक्त निहाल हुए। 

कलश स्थापना की विधि

शक्ति की साधना के लिए नवरात्रि वाले दिन सबसे पहले तन और मन से पवित्र हो जाएं। इसके बाद जिस स्थान पर देवी की प्रतिदिन पूजा करनी हो वहां पर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर एक मिट्टी के कटोरे में कच्ची मिट्टी में जौ बो दें फिर उसके ऊपर एक तांबे या मिट्टी का कलश रखें। कलश को रखने से पहले उसमें एक सिक्का, लौंग और गंगाजल डाल दें और उसके चारों ओर मिट्टी चिपकाकर उसमें भी जौ बो दें। नवरात्रि की पूजा में कलश को हमेशा देवी दुर्गा की दायीं ओर ही रखें और प्रतिदिन पूजा करते हुए उचित मात्रा में पानी से सींचें और नौवें दिन विधि-विधान से पारण करने के बाद उसे किसी पवित्र स्थान पर दबा दें या फिर किसी नदी में प्रवाहित कर दें।
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अखंड ज्योति - फोटो : सोशल मीडिया
घरों में अखंड ज्योति की स्थापना
नवरात्रि में नौ दिन तक घरों में मां दुर्गा की अखंड ज्योति की स्थापना की जाती है। नवरात्र के पहले ही दिन कलश स्थापना और ज्वारे बोए जाते हैं। पहले दिन मां को शृंगार का सामान जरूर चढ़ाएं। नवरात्रि के नौ दिनों में कोशिश करनी चाहिए पूरे मां दुर्गा का स्मरण करें और किसी की निंदा न करें।

इन नियमों का रखें ध्यान

नवरात्रि व्रत में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो लोग नवरात्रि व्रत रखें वो जमीन पर सोएं। इसके अलावा नवरात्रि के नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए, इसके अलावा व्रत में खाई जाने वाली चीजें खा सकते हैं। व्रत के दरमियान मां को रोजाना भोग लगाना चाहिए। इसमें नारियल, नींबू, अनार, केला, मौसमी और कटहल आदि फल के साथ अन्न का भोग लगा सकते हैं। व्रती लोगों को संकल्प लेना चाहिए कि वह हमेशा क्षमा, दया व उदारता का भाव रखेगा।
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मां शैलपुत्री का हुआ श्रंगार। - फोटो : सोशल मीडिया
प्रथम दर्शन शैलपुत्री
शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को देवी स्वरूप शैलपुत्री के दर्शन का विधान है। माता का मन्दिर आदमपुर क्षेत्र के अलईपुरा में स्थित है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है, मां शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए अपने वाहन वृषभ पर विराजमान हैं।
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